"अप्रिल फूल"

हिय हरषैँ, बरसैं सुमन, मनहीँ मन कछु गात,
गईँ घरैतिन मायकै, खबर सुनी जब आज।

धन्य-धन्य भगवान हूँ,धन्य उनन के काज,
जैसी मेरी सुनि लई,सबकी सुनियौ आज।

पोछा, चौका निपटि कै,हुइ निच्चू सब काज,
चाय केतली भरि लये,बने सूरमा आज।

अलबम पिछली आपुनी,देखन कौ मन माहिँ,
“सेफ़र साइड”,पै तहूँ, अखबारहुँ लौ डारि।

ज्यौँ पन्ना हूँ पलटि कै,” *आशा* ” बइठे “कूल”,
धम्म कूदि कै आ गई, बोली” *अप्रिल फूल* “

डा0 आशा कुमार रस्तोगी
एम0डी0(मेडिसिन),डी0टी0सी0डी0,
श्री द्वारिका हास्पिटल,निकट भारतीय स्टेट बैंक, मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी
उ0प्र0 262804

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