कविता · Reading time: 1 minute

अपराध मिलावट

इन्सान है आज बेरहम
करता मिलावट हरदम
न चिंता जान की
न चिंता बेज़ुबान की

बच्चों के मुँह में डाल
जहर बने है दुश्मन
कर दूध में मिलावट बने
ये आज दुःशासन

मिलावट है रिश्तों में
बनावटी मुस्कान है चेहरों में

होता जब तलक मतलब
होते माता पिता अपने
माँ ने किया प्यार दिल से
पर हो गये वो मतलबी आज

(और आखिर में )
मतलबी हो गयी वो
अपने दिलदार से
तोड़ा जब उसने
दिल प्यार में
हो गये शायर हम
उसके प्यार में

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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