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अपनों से न गैरों से

अपनों से न ग़ैरों से कोई भी गिला रखना
आँखों को खुला रखना होंठों को सिला रखना

जो ज़ख्म मिला तुमको अपने ही अज़ीज़ों से
क्या ख़ूब मज़ा देगा तुम ज़ख्म छिला रखना

मासूम बहुत हो तुम दुनिया कि निगाहों में
तकलीफ़ उठाकर भी चेहरे को खिला रखना

दो दिन की मुसीबत में जो छोड़ गए तुमको
तुम ऐसे हबीबों से कोई न गिला रखना

ये दौरे सियासत है इसमें ये रिवायत है
गो दिल न मिलें फिर भी तुम हाथ मिला रखना

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Shivkumar Bilagrami
Shivkumar Bilagrami
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शिवकुमार बिलगरामी : जन्म 12 अक्टूबर : एम ए (अंग्रेज़ी ): भारतीय संसद में संपादक...