अपनों के दरमियां सियासत फ़िजूल है, .........

अपनों के दरमियां सियासत फ़िजूल है,
मक़सद न हो कोई, तो बग़ावत फ़िजूल है.
रोज़ा, नमाज़, हज, या हो सदक़ा -ए -ख़ैरात;
अपने ना खुश हों, तो सारी इबादत फ़िजूल है।।
(अवनीश कुमार )

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