कविता · Reading time: 1 minute

अपने

****** अपने ******
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सच हो जाएंगे सुपने
सभी होंगे साथ अपने

ख्वाब हो जाएंगे हसीं
ख्वाबों में आएंगे अपने

मुखर होंगी मुस्कराहटें
छोड़ देंगे निज डसने

प्रेम की बरसेंगी फुहारें
भीग जाएंगे तब अपने

चेहरे हो जाएंगे रोशन
दर्शन दिखाएंगे अपने

दूर हों जाएं मनमुटाव
गले मिलेंगे जब अपने

मनसीरत करे प्रयास
आसपास होंगे अपने
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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Author
सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन अध्यापक शौक ःःकविता लिखना,पढना भाषा ःःहिंदी अंग्रेजी पंजाबी हिन्दी साहित्यपीडिया साईट पर प्रथम रहना प्रतिलिपि…
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