कविता · Reading time: 1 minute

अपने आप को जानो खुद को खुद से पहचानो

अपने आप को जानो खुद को खुद से पहचानो,
क्‍या थे क्‍या हो गये उस पर एक नजर डालो,
पुराणो की परिभाषा वेदो को पहचानो ,
नही मिला कुछ भी अतीत के घोर पतन से मनुज ,
गगन के घोर तिमिर से मन के अधियार को पहचानो,
वेदो को तुम जानो पुराणो को तुम मानो,
करो अनुसरण राम का सस्‍कति को तुम पहचानो ,
भ्रात़त्‍व भरत सा जानो सेवक हनुमान सा मानो ,
विवेकानन्‍द सी बुध्दि, सुभाष जैसी है शक्ति ,
मंगल पाण्‍डे का साहस उधम सिंह सी हिम्‍मत को तुम अपने में पहचानों ,
लाला की लाठी गाॅधी की खादी,
अदम्‍ब साहस लक्ष्‍मी का अदभुद मीरा की भक्ति ,
शिवा की शान को देखो, राणा की आन को देखो,
टीपू की धार को देखो, तुलसी की तान को देखो ,
हमारे हदय में बस रहे उस भगवान को देखो ,
हम्‍मीर की हठ को देखो मालदेव की मूछो के ताव को देखो ,
अपने अाप को जानो खुद को खुद से पहचानो ,
भरत गेहलाेत
जालोर राजस्‍थान
सम्‍पर्क सुत्र -7742016184

691 Views
Like
27 Posts · 3.5k Views
You may also like:
Loading...