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@@ अपनी प्रिय धर्मपत्नी को समर्पित @@ महिला दिवस पर !!

अपनी तो आत्मा भी तुम, और परमात्मा भी तुम
मेरे लिए धर्मात्मा भी तुम, मेरी आत्मा भी तुम !!
दुनिया का खजाना तेरे सामने मेरे लिये है अनजान
तू है सब कुछ तो , जमाना है सारा मेरे लिए बेजान !!

वो लम्हे, वो वादे निभाए , तुम ने इस जीवन की राह में
तुम से बड़ा दुनिया में कोई भी दोस्त नहीं है इस जहान में
हर दुःख दर्द में साथ निभाया है, छोड़ अपने घर का प्यार
तुम ही हो मेरी मुस्कान, तुझ पर कुर्बान मेरा सब प्यार !!

तुम्हारा अंदाज इस परिवार को बहुत भा गया,
बच्चों का भी प्यार आकर उस में चार चाँद लगा गया
काँटों पर भी चली तुम मेरे साथ, गमो को भी छुपा गयी
कैसे न मानू तुम्हारा यह एहसान ,वो सब तुम समझा गयी !!

वो रोजाना का तनहा सफ़र, तुम्हारी यादों के संग गुजर रहा
तुम्हारा प्यार से यह कहना ,पूछना, दिल को छु गया
जिन्दगी कितने पल की है, न मैं जानता, और न तुम जानती
बस इन पलों को समेट लो, मेरे इस छोटे से जहान में !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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