निज उर-तकदीर पर/सुबुधि ज्ञान हीर कर |

रो मत जग-पीर पर|
सुबुधि, ज्ञान-हीर कर|
आत्म-सुख लिखो स्वयं|
निज उर-तकदीर पर|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
नि – सुभाष नगर कोंच -285205

उर=हृदय

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