कविता · Reading time: 1 minute

“अन्याय”

न्याय की आशा में लाखों लोग न्यायलय के चक्कर लगाते रह जाते हैं।मैं समझता हूँ यह उन लोगों रे साथ “अन्याय”है जो ग़रीब हैं।आप भी राय दें:-
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“अन्याय”
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यह लो एक टुकड़ा ,
यह तुम्हारे हिस्से का,
यह न्याय है,
बाक़ी भी मिल जायेगा।
धीरे धीरे,
सब्र कर,
लंबी लाईन है,
तेरे आगे भी,
पीछे भी!!!!!
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राजेश”ललित”शर्मा
२३-१-२०१७

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