कविता · Reading time: 1 minute

अन्न का आदर करो ..

भगवान ने दिया है तुम्हें ,
विभिन्न प्रकार के अन्न ,
तुम्हारी भूख मिटाने को ।
उसका धन्यवाद करो …

मौसम की मार सहकर,
बड़े ही परिश्रम से ,
अन्न को खेतो में उगाता है ।
उस अन्न दाता के परिश्रम की कद्र करो …

रसोईघर के उमस भरे वातावरण में,
बड़ी मेहनत से और चाव से उस अन्न का ,
भोजन तैयार करती है ।
उस प्रेम भरे भोजन का सम्मान करो …

यह अन्न है किसी का उपहार ,
किसी का परिश्रम ,
तो किसी का प्यार ।
उसे प्रेम और श्रद्धा से ग्रहण करो ।
और तीनो का दिल से धन्यवाद करो ..

जितनी भूख है उतना ही ,
अपनी थाली में परोसो ,
नहीं भूख तो नालियों में,
कूड़ेदान और सड़कों पर मत फेंको ।
व्यर्थ अन्न मत बरबाद मत करो ,

तुम्हारे पास अगर भूख से जायदा ,
अन्न है तो उसे किसी भूखे प्राणी को खिला दो ।
दुआ ही देगा संतुष्ट और प्रसन्न होकर ,
और तुमको धन्यवाद देगा ।
अपने जीवन में एक उपकार तो करो …

अन्न है कीमती खजानों से भी बहु मूल्य ,
अतः इसका दान करना भी है अमूल्य ,
सबसे बड़ी सेवा जगत में ,
प्रभु भक्ति का सार भी इसी में ।
निष्कपट और निश्छल भाव से अन्न की सेवा करो ।
अन्न के आदर करो …

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