विभिन्न–विभिन्न दोहे

बने रहेंगे दोस्त हम, मित्रगणों के बीच
सभी चेहरे एक से, जितनी फोटो खींच //1.//

अब न व्याप्त हो भय कहीं, अब न हो कहीं युद्ध
उठो! सभी!! आओ चलें, परम पिता है बुद्ध //2.//

हो साधन कोई यहाँ, रहे हमेशा पास
प्यास हिया की तब बुझे, रहे आपकी आस //3.//

सफ़र आपके साथ तो, पतझर भी मधुमास
खिले-खिले जब दिल मिलें, हर मौसम है ख़ास //4.//

कब गुज़रा वो लड़कपन, कब हुए हम जवान
मिले बुढ़ापे में कहाँ, ज़िन्दगी के निशान //5.//

दुःख कहे का मित्रवर, हीरा-मोती साथ
सुख-दुःख मिलके बाँटिये, कभी न छोड़ो हाथ //6.//

गुटका बीड़ी हो गए, लॉक डाउन में बन्द
क्यों कोरोना काल में, धन्धा-पानी मन्द //7.//

सभी में सर्वश्रेष्ठ हैं, ब्रह्मा-विष्णु-महेश
प्रथम वन्दना आपकी, गौरी पुत्र गणेश //8.//

बुद्ध पूर्णिमा के दिवस, संकल्प लें प्रबुद्ध
विश्वव्यापी शान्ति हो, कहीं न हों अब युद्ध //9.//

कला क्षेत्र में बेहतर, कर जाते कुछ हाय
मक्खी मारे बैठ के, दफ़्तर में कविराय //10.//

क़िस्मत ज़ीरो हाय जब, लाख दीजिये पोज़
माया नगरी में नहीं, बनते सब हीरोज़ //11.//

सितार प्रतीक आपका, होंठो पर मुस्कान
बेजोड़ कलाकार हो, बढ़ी सभा की शान //12.//

उत्तम गायक आप हैं, सबको ये विश्वास
क्लासिक म्यूज़िक आपका, सबको आये ‘रास’ //13.//

शब्द ‘मा’ से मुकेश भी, और है महावीर
एक कम्पनी एक ग्रुप, इक जैसी तक़दीर //14.//

अजगर डूबे जश्न में, मारा एक भुजंग
सेक सियासी रोटियाँ, बच गए सब दबंग //15.//

करी नौकरी जग मुआ, बना सका न माल
कल भी भूखे हम फिरे, अब भी हैं कंगाल //16.//

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