Feb 22, 2017 · गीत
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अनुशासन

अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .
तिनका तिनका मिल घर बनता होती आशा पूरी है .

चलते जाना कदम पड़ेंगे राह बनेगी अपने आप .
धीरे चलना न थकना तुम धीरे धीरे जपना जाप .
कदम में दम है नापेगा वो चाहे लम्बी दूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

हार रहे हो बार बार हजार बार कोशिश करना .
हार के आगे जीत लिखी है सूत्र मित्र ये रट लेना .
हार करो स्वीकार नहीं जग बोले जो मगरूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

सतत परिश्रम करके देखो सिर ऊँचा हो जायेगा .
श्रम के बल पर ही तो प्यारे मंजिल अपनी पायेगा .
भारी भट्टी में तपकर बनती रोटी तंदूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

हम तो अपनी धुन के पक्के चाहे कोई कुछ बोले .
यही सही है होता भी है मतवाले का तन डोले .
कठिन काम को करने को खुद को देना मंजूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

जीवन एवन है न भूलो भूल भुलैया में तुम आज .
वरना वन वन में भटकोगे मंजिल जबकि तेरे पास .
यहीं कहीं पर छिपी हुई जो मृग तेरी कस्तूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

गुमनामी के शहर में रहते लिये करोड़ी लाख करोड़ .
ऐसा भी क्या पैसा है जो लगा रहे हैं लोग दौड़ .
बापूजी के संयम को न कहना कि मजबूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

-कवि साहेबलाल ‘सरल’

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*संक्षिप्त परिचय-* 1. नाम- साहेबलाल दशरिये 'सरल', 2. पिता का नाम- श्री पन्नालाल दशरिये 3.... View full profile
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