Skip to content

अनुराग

Neelam Sharma

Neelam Sharma

कविता

June 8, 2017

प्रणय स्नेह अनुरक्ति प्रेम और अनुराग
जीवन की बगिया खिलाते जैसे पुष्प पराग।

अनुराग है कण कण में,
अनुराग है जन्म मरण में।
अनुराग है नभ और थल में,
है अनुराग अग्नि और जल में।

अनुराग अलंकार जीवन का,
है अनुराग झंकार जीवन में।
अनुराग में उन्माद भरा है,
है अनुराग प्रसाद जीवन में।

अनुराग विवाद भी है और
है अनुराग संवाद जीवन में।
अनुराग श्रृंगार जीवन का,
है अनुराग से विस्तार जीवन में।

कभी अनुराग ज्वार है लाता,
तो कभी करता उद्धार जीवन में।
नीलम जो अनुराग अपनाले, तो
झंकृत हो झंकार जीवन में।

नीलम शर्मा

Author
Neelam Sharma
Recommended Posts
साथी साथ सुहाना तेरा जीवन बगिया महकाए ।
साथी साथ सुहाना तेरा जीवन बगिया महकाए । हर मुश्किल आसान बने निज मार्ग सुगम होता जाए, रीति अनोखी इस जीवन की, धूप छाँव आए... Read more
बेटियाँ
।। बेटियाँ ।। सारे संसार में भगवान की सबसे अच्छी कृति हैं बेटियाँ , बाप का मान सम्मान और ईश्वर का वरदान हैं बेटियाँ ।... Read more
नारी का अपमान न हो, वो सुहाग बना
पदांत- बना समांत- आग जीवन का उत्कर्ष, प्रेम और त्याग बना. सर्वधर्म समभाव सब से, अनुराग बना. मोह, माया, मत्सर से, नहिं हो, तू प्रेरित,... Read more
मुक्तक
मुक्तक अनुराग मृदुल मन की लता हिलती है, अनुराग उसमें है। विरहन विरहा में जो जलती है,, त्याग उसमें है। किसी भी रूप को दूं,... Read more