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अनुभूति (विचार संकलन)

संवाद-:

अगर गलत हो तो बताओ?

नज़रें एक झलक देखती हैं और दिल पूरी तरह से महसूस कर लेता है ,,,
कि सामने बाला कैसा है?
उसके बाद शब्दों से एक दूसरे को बहकाते हैं
अपनी-2 अच्छाई गिना कर यही से भ्रम पैदा होता है।
ऐसा बिल्कुल नही है, कि हमें किसी को जानने के लिए बार- बार मिलना पड़े।
इंसान का असली चेरहा पहली नज़र मे ही सामने आजाता है भ्रम तो बाद में मीठे -2 शब्दों में पिरोकर परोसा जाता है।।
आप इसको आज़माइए
किसी इंसान के बारे में जो राय आपकी पहली नज़र में होगी वह एक दिन सही सावित होगी।
और बताओ
हम आपसे बहुत न मिले न सही
phli nazar m sb apne apko fake hi dikhate h
Matlab Accha hi sabit karte hain..
दिखावा अलग पता चल जाता है
जो वास्तविक होता है वह दिखावा नही करता
Par log time s
Ke sath badal bhi to jaate h.. zaruri nai ki 2 saal phle jo insaan tha..vo aj bi wahi vaisa ho..
हाँ यह ठीक है. …..
To kisi ko sirf phli nazar se parakhna to sahi nai hai na .. ?

इंसान दो चीजों से बनता है-:

!!एक प्रकृति और दूसरा प्रवृत्ति!!

इंसान की प्रवृत्ति बदल जाये यह अलग बात है लेकिन प्रकृति कभी नही बदलती

कह रहीम उत्तम प्रकृति कहा कर सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नही लिपटे रहत भुजंग।।

जो मनुष्य उच्च प्रक्रिति है उस किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव नही पड़ता है।
ठीक वैसे ही जैसे चंदन का बृक्ष होता है जिस पर सांप लिपटे रहते हैं लेकिन उस पर कोई फर्क नही पड़ता है।

कहा जाता है कि जिस पेड़ पर सांप लिपट जाएं वह सूख जाता है।।
लेकिंन चन्दन की शीतल प्रवृत्ति के कारण उस पर बिष का भी कोई प्रभाव नही पड़ता है।
इस प्रकार समाज मे देख गया है कि-:
अमीर ईमानदार इंसान अगर गरीब हो जाये तो मेहनत कर के अपने परिवार को पाल लेता है ,लेकीन चोरी नही करेगा यह एकदम सत्य है।
यह होती है प्रकृति जो स्थिर होती है।

लेकिन इसके विपरीत एक अमीर बेईमान आदमी अगर गरीब हो जाये तो वह तो छोड़ो उसकी औलादें तक चोर हो जाये यह संभव हैं।
यह होती है प्रवृर्ति जो बदल जाती है।

इस प्रकार अगर देखा जाए तो,,,,

प्रथम मुलाकात में ही इंसान को परखा जा सकता है।

बिना बात-चीत किए कैसे परखा जाए-:

1- हाव-भाव (Body language )
2- शिष्टाचार निभाना।
3- रंग रूप एवं शरीरिक बनावट के अनुसार मन मे उत्पन्न होने बाला प्रथम विचार। (first appearance}
4- सम्मान एवं स्वागत का तरीका।(How to treat)
5- समय एवं स्थान का चुनाव मीटिंग के लिए।
(time and place)

बात चीत के उपरांत-:

6- प्रथम बातचीत की शुरुआत कैसे की?
7- वाक पुटिता।
8- शब्दों एवं भाषा का उपयोग।
9- नज़रों से नज़र मिला के बात करना या इधर-उधर देखना। अर्थात नजरें चुराना।
10- आपनी ही बात करना।
11- – बे-वजहा हंसना या अति से अधिक शांत रहना। (Over Acting)
12 – आपकी हर शर्त को मानना या ठुकराना।
13- अति से अधिक मीठा या कड़वा बोलने बाला।
15- आपकी बातों से सामने बाला प्रभावित हो रहा है या ढोंग कर रहा। (How to react)
16- बात को सीमत शब्दों में करना या खींचते जाना। (Balance Talk)
17- बोलचाल और पहनावा आदि।

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संवाद-: सर्वाधिकार सुरक्षित, स्व-रचित,
बातचीत के अंशों पर आधारित (राजेंद्र प्रताप सिंह)

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