अनुभूति प्यारी सी ...

अनुभूति प्यारी सी !
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मीठी-सी प्यारी -सी
कितनी न्यारी-सी …
प्रेम-प्यार की अनुभूति
जगा देती तन-मन में
नई ऊर्जा नई स्फूर्ति
सब कुछ खिलखिलाता
बता न पाऊं वो सुवास
साँसे बन बसी मन में
अंतरतम का अहसास
प्रिय-प्रिय की हर बात
लगे अति प्यारी-प्यारी
झुकी पलकें या बंद आँखें
होती तेरी ही छवि न्यारी
स्मित-हास्य की फुहार प्रस्फुटित
प्रेम-निर्झर प्रवाहित प्रतिक्षण
कण-कण में सुवासित
मूर्त आनंद-सा क्षण क्षण …
*****
****अनिता जैन ‘विपुला’

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