कविता · Reading time: 1 minute

क्यूँ इनके पीछे पड़ी है?

क्यूँ इनके पीछे पड़ी है?
अनहोनी तुझे कौन रोके, कौन तुझे समझाए,
क्यूँ यह चीथड़े संभाले मलिन लोग,
अभावग्रस्त, अव्य्व्स्थाओं के मारे लोग,
फिरते सड़कों पर मारे मारे यह बेचारे लोग,
बस तेरी नज़र में आए !
क्यूँ इनके पीछे पड़ीं है,
देख ध्यान से तेरे आगे तो दुनिया खड़ी है,
फिर क्यूँ यह आभाग़े तेरी कृपा के पात्र बने हैं?
क्यूँ बस यह ही तेरी नज़र में आए,
अनहोनी तुझे कौन रोके, कौन तुझे समझाए?
क्या कम है दुशवारियाँ इनकी,
जो और तू है बढ़ाए,
सच बता क्या ली है तूने रिश्वत,
या तुझे भी इंसान नही लगते,
यह मिट्टी के जाए,
या प्यार इन्ही से तू करती है,
लगता है मुझे तू इन पर मरती हैं,
इसीलिए इनको ही चुनती है,
इनको डसे बिना तुझसे रहा न जाए,
अनहोनी तुझे कौन रोके, कौन तुझे समझाए,
चाँदी का चम्मच लिए, पैदा हुए धनवानों को,
तू भी डर कर हाथ न लगाए,
क्यूँकि पैसे के बल पर , वह तेरी औक़ात तुझे दिखाएँ,
तू निरंकुश बनी, कुचले हुए को और दबाए,
अनहोनी तुझे कौन रोके, कौन तुझे समझाए?

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