मुक्तक · Reading time: 1 minute

”अधूरी तू नहीं होती अधूरा मैं नहीं होता”

निगाहों में अगर यूँ आशिक़ी का अश्क न होता,
तो कमबख्त इस दुनिया में इश्क न होता,
जो मोहब्बत करते ही इज़हार कर दिया होता,
अधूरी तू नहीं होती अधूरा मैं नहीं होता |

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