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अधरों पर रखी हसरते मुल्तवी

रात की हर पहर ख्वाहिशे ले गई.
दिल ने सज़दा किया मेरी ज़िक्र ले गयी.
तुम सम्भालो मुझे रात कुछ केह गयी.
दिल की तम्मना जवां बात दिल की कह गयी.
अधरों पर रखी मेहबूब हसरते मुल्तवी। ……१

तुम सम्भालो ये अपनी तम्मना सही.
नचीज़ो की हसरत सनम दगा दे गयी.
हम बहकते रहे हर घड़ी जियारत किये.
आओगे सनम प्यासी तम्मना लिए.
अधरों पर रखी मेहबूब हसरते मुल्तवी। …….२

अवधेश कुमार राय.
धनबाद झारखण्ड

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