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अदा-ए-यार

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

शेर

October 6, 2017

हमारा प्यार भी कभी जो किस्सा बन जाता है

अगर यार को रिश्ता प्यार का निभाना आता है ।।
?मधुप बैरागी

मेरे महबूब को देखो कभी नजरे झुकाता है

कभी नजरे उठाता है कभी दिल को चुराता है ।।
?मधुप बैरागी

कभी वो मुस्कुराता है कभी गुनगुनाता है

लिहाजे-शर्म से जब वो घूंघट उठाता है ।।
?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more

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