.
Skip to content

अदभुत है बिटिया

Jitendra Dixit

Jitendra Dixit

कविता

September 10, 2017

दिनभर की थकान एक पल मैं हटा देती है,
दौड़ कर अपना लॉलीपॉप मुझे चटा देती है।
जिंदगी रोज जो मुझे मुश्किलों मैं फसा देती है,
उदासी मै भी मेरी बेटी गुदगुदा के हँसा देती है।
अपनी शरारतों से कभी कभी माँ की रुला देती है,
उसकी माँ भी गले लगा उसे गुस्से को भुला देती है ।
जब अपनी ऊंचाई से ऊँची रखी चीजों को उठाने की,
करती है कोशिश उसकी ये आदत हमें हौसला देती है।
हम दोनों मैं हो जाती है जब कभी कभी अनबन,
बिटिया बीच मैं बैठ दोनो की दूरियों को पटा देती है।
मैं उदास हु तो वो उदासी को एक पल मैं हटा देती है,
दौड़ कर अपना लॉलीपॉप मुझे चटा देती है।
रचनाकार: जितेंन्द्र दीक्षित,
पड़ाव मंदिर साईंखेड़ा।

Author
Jitendra Dixit
कविता मेरे लिये एक रिश्ता हैं जो मेरे और आप के दरमियाँ हैं। अपना दर्द अपनी खुशी अपनी आवाज आप तक पहुचाने के लिए लिखता हूं।
Recommended Posts
माँ,,,,,,,
मुक्तक (1) मोहब्बत से भरा एक पल भी वो खोने नहीं देती, मेरे ग़म में भी तन्हा वो मुझे होने नहीं देती। मैं सर गोदी... Read more
मुक्तक
कभी गम कभी मुझको तन्हाई मार देती है! तेरी तमन्नाओं को जुदाई मार देती है! मैं राहे-इंतजार में बैठा हुआ हूँ लेकिन, ऐतबार को तेरी... Read more
खिजाओं  में भी जो  फूल  खिला देती है
खिजाओं में भी जो फूल खिला देती है मायूसियों में उम्मीद जगा देती है आधी -अधूरी सी दुनियाँ को मेरी माँ अपने प्यार से मुकम्मल... Read more
माँ मुझे संसार दिखाओ
RASHMI SHUKLA लेख Mar 2, 2017
बेटी कहती है माँ से क्यों सबकी सुना करती हो, मुझे क्यों सबके कहने से भुला देती हो, मुझे भी सबके बीच बुलाओ, माँ मुझे... Read more