{{ अतीत }}

आज जब भी अपने अतीत में झांकती हूँ, तो बहुत कुछ याद आ जाता है ।जो पल बीत गया वो अपने साथ बहुत कुछ ले कर चला गया । कौन सही, कौन गलत इसका हिसाब भी दिल लगाने बैठ जाता है । कुछ मीठे से लम्हे थे जिन्हें सोच कर दिल आज भी ख़ुशी से मुस्कुरा देता है | मगर उस ख़ुशी की कीमत बहुत महंगी थी ,जिसे सोच कर अपने ही अतीत से घृणा हो जाती है | काश ज़िन्दगी में भी कोई डिलीट बटन होता तो उस पन्ने को ही मिटा देते |

कभी कभी सोचती हु,क्या अतीत में इतनी शक्ति होती है, की वो आपके वर्तमान और भविष्य पे अपना असर छोड़ दे ? उसका दामन छूट के भी उसके धब्बे आपके दमन और अंतरात्मा पर रह जाये ? किसी का मिलना सही होता है या बिछड़ना सही होता है ? अपने अच्छे बुरे अतीत के लिए किसे दोष दे ? खुद को , हलात को या अपनी किस्मत को ?अगर वो अतीत आज वर्तमान में होता तो क्या होता ? शायद ज़िन्दगी ऐसी नहीं होती,……. या तो आबाद हो जाती या और बर्बाद हो जाती |

क्या अतीत को इतना अधिकार होता है क्या ? के वो आपके हर लम्हे पे अपना अधिकार स्थापित कर ले , फिर भी आपके ही चरित्र पे उगलिया उठता रहे | हम अक्सर अपने अतीत की सज़ा अपने वर्तमान को देते रहते है | ये कितना सही है के , अपने अतीत को वर्तमान से जोड़ दे ? अतीत अपने साथ बहुत कुछ सीखा के जाता है, लेकिन क्या हम अपने गलतियों से कुछ सीखते है? शायद अब पुनः चिंतन हमें ज़रूर करना चाहिए की अतीत को अतीत में ही पूर्ण विराम दे सके |

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