"अतीत"

🌻 अतीत 🌻

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आज फिर अतीत ने मेरा दरवाजा खटखटाया…
किवाड़ खोला तो मैंने अतीत को खड़ा पाया…
पूछा मैंने…..
अरे अतीत …! तू यहाँ कैसे आया…..??
तुझे तो मैं छोड़ आया था किसी ठण्डे बस्ते में…
फिर क्यूँ आया तू मेरे वर्तमान…मेरे भविष्य के रस्ते में…??

कुटिलता लाकर चेहरे पे अतीत मुस्कुराया…
” मैं तो अतीत हूँ, मैं पीछे – पीछे चला आया…
मुझसे भला कहाँ कोई पीछा छुड़ा पाया…””

स्तब्ध थी मैं सुनकर उसकी ये वाणी
कश्मकश से निकलकर उसी पल मन में ठानी
भले ही ये अतीत जीवन का इक हिस्सा है
पर अब ये मेरा बीता हुआ इक क़िस्सा है
ख़ुद से विभक्त करना ही इसको, आज श्रेयस्कर है…
क्योंकि मेरा वर्तमान, मेरे भविष्य की ओर अग्रसर है…

एक स्थायित्व के साथ मैंने किवाड़ बन्द किया
लेट गई बिस्तर पर और आँखों को मूँद लिया

सूरज भी नन्हीं किरणों संग स्वागत को खड़ा था
कानों में मिश्री की डलियों सा कुछ घोल रहा था

आँखें खोलीं, तो मेरा वर्तमान मेरे गालों पर
प्यारी थपकियाँ देकर मुझे जगा रहा था…..
एक मीठी सी मुस्कान के साथ
मेरा भविष्य मुझे बुला रहा था…..😊😊

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प्रियंका सोनी ✍️

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