अजीब सा कमाल है

गीतिका
आधार छंद …. वाचिक चामर

आपका कमाल भी अजीब सा कमाल है ।
आपका जवाब भी सवाल ही सवाल है ।

हो रहा कहाँ कहीं दिखा नहीं यहाँ कहीं ,
आप सोचते रहे बवाल ही बवाल है ।

काम कीजिए जनाब वक़्त है मिला हुआ ,
सोच लीजिए हुज़ूर वक़्त एक चाल है ।

लोकतंत्र का लिहाज आँख बीच राखिए ,
आँख फेर लें न लोग तख्त फिर मुहाल है ।

आप भी यहीं रहे पले बढ़े बने खुदा ,
आपका हुज़ूर ये जमीन ही महाल है ।
… सतीश मापतपुरी

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