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अजनबी

राजेन्द्र कुशवाहा

राजेन्द्र कुशवाहा

कविता

March 7, 2017

दो पल मे ही जीने की खुशी दे गया वो।
दिल से दिल लगाने की खुशी दे गया वो।

वह अमीर हो या गरीब हमे क्या मतलब,
बस रूखे लवो पर एक हंसी दे गया वो।

कल जो फकीर था उसके महल गगन चुमते है,
फकीर होकर भी इतनी दुआ दे गया वो।

जुस्तजु ने रूबरू करा दिया राज तुझको,
तिजोरी खोल के लुटाना दे इतनी दौलत दे गया वो।

राजेन्द्र कुशवाहा

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Author
राजेन्द्र कुशवाहा
DOB - 12/07/1996 पता - मो.पो. - चीचली, जिला - नरसिंहपुर, तहसील - गाडरवारा, म. प्र. मोबाइल न. 7389035257 करना वहीं राजेन्द्र जो दुनिया को दिखाई दे। स्वरो को करना बुलंद इतने की लाखों मे सुनाई दे।

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