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अजनबी

Raj Vig

Raj Vig

कविता

February 18, 2017

गुजरते हुए पल
बोझिल से लग रहे हैं
आशाओं के दीपक
बुझते से लग रहे हैं ।

बदली हुई डगर मे
अपने पराये लग रहे हैं
नज़रो से दिखते रस्ते
धुंधले से लग रहे हैं ।

आसमान मे बादल
तन्हा से लग रहे हैं
उड़ते हुए परिन्दे
खामोश लग रहे हैं ।

उठती नजरों के तीर
सीने मे लग रहे हैं
हम आपको आप हमको
अजनबी से लग रहे हैं ।।

राज विग

Author
Raj Vig
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