May 26, 2018 · बाल कविता
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अच्छी आदत

रोज सवेरे किरणें आकर
दरवाजे पर देतीं दस्तक
बड़े प्यार से हमें जगाने
आ जाती हैं वो खिड़की तक

मम्मी फ़ौरन ही उठ जाती
खिड़की का पर्दा सरकाती
चेहरे पर मुस्कान लिए वो
करती हैं उनका यूँ स्वागत

फिर वो आकर हमें जगाती
चीख चीख कर वक़्त बताती
नींद और आलस के मारे
बढ़े हमारी और नज़ाकत

धीरे धीरे हाथ चलाते
देर स्कूल को जब हो जाते
पापा मम्मी टीचर जी की
होती है हम पर डांट डपट

काम समय पर देखो करना
अनुशासन में बँध कर रहना
जल्दी सोना जल्दी उठना
होती ये सब अच्छी आदत

26-05-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद... View full profile
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