May 4, 2021 · मुक्तक
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जन्नत की हूर – डी के निवातिया

अच्छा नहीं होता
***
हुस्न पर शबाब का सुरूर अच्छा नहीं होता,
खूबसूरती पर करना गुरुर अच्छा नहीं होता,
पानी के बुलबुले की तरह होती है ये जिंदगी,
समझना खुद जन्नत की हूर अच्छा नहीं होता !!
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डी के निवातिया

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ ,... View full profile
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