अगर तुम साथ चल दो तो सफ़र आसान हो जाये

अगर तुम साथ चल दो तो सफ़र आसान हो जाये
तुम्हे पाकर के हम सबसे बड़े धनवान हो जाये

वज़ाअत और सीरत में तेरी जादूगरी ऐसी
तुम्हे जो देख ले शैतान भी इन्सान हो जाये

ये दर्दे-दिल हमेशा के लिए मिट जाएगा हमदम
अता जो इक दफ़ा हमको तेरी मुस्कान हो जाये

ज़रा सी हुस्न की दौलत हमारे नाम भी कर दे
ये दौलत जो मिले हमको तो हम सुलतान हो जाये

न बदले तुम न बदले हम न बदले ये सफ़र ‘माही’
हमारा तुम तुम्हारा हम चलो ईमान बन जाये

माही

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प्रकाशन साहित्यिक गतिविधियाँ एवं सम्मान – अनेकानेक पत्र-पत्रिकाओं में आपकी गज़ल, कवितायें आदि का प्रकाशन...
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