अखिर क्यों---- कविता ये 2010 मे लिखी गयी कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है

अखिर क्यों—- ये 2010 मे लिखी गयी कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है

विस्फोटों की भरमार क्यों है
दुविधा में सरकार क्यों है
आतंकी धडल्ले से आते हैं
सोये पहरेदार क्यो है
सबूतों को झुठलाये पाक
दुश्मन झूठा मक्कार क्यों है
दुश्मन तेरी मानेगा क्या
ऐसा तेरा इतबार क्यों है
जो अपना दोशी ना पकड सका
उस अमरीका से गुहार क्यों है
शेर की माँद के आगे
गीदड की हुंकार क्यों है
अपने दम पर भरोसा कर
फैसले का इन्तजार क्यों है
शराफत से ना मने दुश्मन
चुप तेरी तलवार क्यों है
जो करना है जल्दी करो
आपस में तकरार क्यों है
भारतवासियो जागो अब
बेहोश बरखुरदार क्यों है

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