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अकेले प्रथम रेल यात्रा – (१०० शब्दों की कहानी)

मंजु अकेले रेल में चढी चाचा ने जो बिठाया, अवंतिका में । माता-पिता भी पास न थे । वह तो नौकरी कर रही , उसे रेलवे में नौकरी हेतु साक्षात्कार के लिए अचानक ही जाना पड़ा , पर अचानक ही रेल पटरी से उतर गई, इंदौर से 25कि.मी.भी नहीं आए थे । वह चिंता से बैठी बाहर निहार रही थी और सोच रही किसी तरह निश्चित स्थान पर पहुंचे । देर हुई पर सहमी सी किसी तरह पहूंची, सफलता भी मिली, इससे वर्तमान में हर लड़की को अकेले रेल यात्रा करने की आवश्यकता का पाठ मिल रहा है ।

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