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अकेला एहसास..

Ranjeet GHOSI

Ranjeet GHOSI

कविता

October 8, 2017

चलना अकेला ही मुझे
बस यादों का साथ है तेरा
कोई रास्ता दिखाई देता नही
बस एक विश्वास है तेरा
मंजिल भी धुंधली दिखाई पड़ती
बस आंखों में साफ है दिखता तेरा चेहरा
जीवन का यह मंजर बड़ा अजीब सा लगता है
बस मेरी आशा को साथ है तेरा
सांसो में बसा बस एक नाम है
बाकी सब एहसास है तेरा !!

रंजीत घोसी

Author
Ranjeet GHOSI
PTI B. A. B.P.Ed. Gotegoan
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