अकेलापन

उम्र का ये पड़ाव कैसा है , जहाँ सब कुछ तो है फिर भी अकेलेपन का घाव दिल पे कैसा है !
अपना तो हर कोई है आंखो के सामने , फिर भी आंखों मे इक इंतजार कैसा है ।
चाहते तो हैं सबको बराबर इसी दिल से फिर भी ये चाहत का इक नया अंदाज कैसा है ।
बचपन से आज तक जो रोता था मै आंखो मे आंसुओ को लेकर, आज मेरा ये दिल ही दिल मे रोने का अंदाज कैसा है ।
जो कभी न बोल पाया अपने चाहने वालों से , वो आज बोलने को मेरा दिल तरसता है, ये आज अचानक मेरे दिल का हाल कैसा है !

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 174

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share