मुक्तक · Reading time: 1 minute

अकबर है तू, अर्जमंद है तू

1.

अकबर है तू
अर्जमंद है तू
जी रहे हैं हम
इक तेरे करम से

2.

अजनबी न कहना हमको
ऐ मेरे खुदा
साख से जो पत्ता गिरता
वो भी इक तेरे करम से

1 Like · 28 Views
Like
You may also like:
Loading...