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~~ अंधी और बदनाम गलीआं ~~

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 27, 2017

कुछ तो वजह होगी,
जो उस ने जिस्म बेच दिया अपना
उस के दिल से पूछो कभी
की क्या क्या नहीं खो दिया अपना !!

बड़ी कडवाहट लेकर
वो खुद को धकेल चुकी है
उस बदनाम गली में
अपना मन भी बेच चुकी है !!

वकत के हाथो वो
बेहद लाचार जो हुई है
सपनो को मन में दबा कर
घर से भी वो बेघर हुई है !!

पर आज उस काम को
न जाने कितनी कर रही हैं
वो तो जिस्म बेच रही
खुद के मन को हार कर
पर तुम तो अपने शौंक की
खातिर हद से गुजर रही हो !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

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