कविता · Reading time: 1 minute

अंदाज़ अच्छे नहीं लगते

कभी जो हो जाते हैं हम तुम्हारी अदाओं पर फिदा।
तुम्हें हमारे अंदाज अच्छे नहीं लगते।।
लोगों को भा जाती है फितरत हमारी।
आप को हमारे लिबाज अच्छे नहीं लगते।।

चंद कदमों के दूर है मोहब्बत हमारी।
हमें करीब के सुर और साज अच्छे नहीं लगते।।
इश्क कहता है सुन मुमताज हमारी।
मोहब्बत में बनाए संगमरमर के ताज अच्छे नहीं लगते।।

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