कविता · Reading time: 1 minute

अंतिम पायदान का व्यक्ति

अंतिम पायदान का व्यक्ति

वो है
अंतिम पायदान पर
धकेला गया व्यक्ति

उसके द्वार पर
होती है दस्तक
धर्माचार्यों की
इस आग्रह के साथ
धर्म है असुरक्षित
करो शामिल
अपने नवयुवकों को
धर्म की लड़ाई में

कभी होती है दस्तक
सफेदपोशों की
इस आग्रह के साथ
देश और उसकी सीमाएं
हैं असुरक्षित
देकर उसको वोट
करो देश मजबूत

कभी होती है दस्तक
तथाकथित स्वदेशीवादियों की
इस आग्रह के साथ
देश और उसकी अर्थव्यवस्था
है असुरक्षित
स्वदेशी अपनाओ
अर्थव्यवस्था मजबूत करो

जबकि वह स्वयं
है असुरक्षित
उसकी चिंता
नहीं करता कोई

-विनोद सिल्ला©

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Author
टोहाना, जिला फतेहाबाद हरियाणा
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