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” ———————————————– अंखियन छूटा काजर ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

August 1, 2017

हंसी कैद घूँघट में देखो , खुशियां छलके बाहर !
हाथों में चुड़ले खनके हैं , पैरों बाजे झांझर !!

अभी बेड़ियां नहीं हैं छूटी , टूटे ना है बन्धन !
द्वार देहरी लाज है पल्लू , अंखियन छूटा काजर !!

घट पनघट हैं खेत खले हैं , चूल्हे चौके संग में !
दूध दही है माखन घी है , अगनां में हैं ढाँढर !!

खेतों की रखवाली है और, कभी डागले बैठे!
हाथों में पत्थर गोफन है , कभी उड़ाते पाखर !!

श्रम से है परहेज़ नहीं , कांधे जिम्मेदारी !
प्रभु की मेहर यहां बरसती , हम हैं निज के चाकर !!

हमने धन संतोष है पाया , बाकी सब धूसर है !!
थोड़े ही में खुश जानो हम , जितना पाया पाकर !!

आँगन शिक्षा चहक रही है , पीढ़ी अब बदलेगी !
अब विकास के द्वार खुले हैं , गीत खुशी के गाकर !!

बृज व्यास

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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