अँधा कानून या कानून अँधा ??

वाह मेरे देश , तुझ को सलाम
यहाँ कानून अँधा है, या अँधा कानून है
मैने तो जिन्दगी बिता डाली, इन्साफ के लिए
तेरी आँखों से सच्चाई का पर्दा न उतरा

क्या फायदा तेरा , बूत बन के रहने का
अमीरों के फैसले हो जाते हैं, यहाँ पल में
गरीब बेचारा, हर पल सताया जाता है
हराम की दौलत समझ लेते हैं वकील उनकी
तभी तो उनका सारी रात जश्न मनाया जाता है !!

तारिख पर तारिख की खातिर गरीब
सारा सारा दिन धक्के खाता रहता है
पीने को पानी भी नहीं मिलता कोर्ट में
अमीरों को ठंडी बोतलों से नेह्लाया जाता है !!

लगी रहती हैं कतारें सारा दिन यहाँ पर
गरीब सोचता है, जज फैसला देगा आज मुझ पर
पर वक्त की मार से गरीब की, दुनिया उजड़ जाती है
जब अमीर भर देता है , झोली जज के घर जाकर !!

हम गरीबों का सहारा तो, अब भगवान् भी नहीं रहा
वो भी रिश्वत की जंजीरों में, जकड जो रहा है
बड़ी लानाह है इस देश की कानून प्रक्रिया पर
इक इंसान लेने की खातिर गरीब, घर के बर्तन बेच रहा है !!

क्यूं लगती है कोर्ट और क्या करते हैं जज यहाँ
केवल तारिख का दिखावा करने का, जब होता है मन उनका
चमचा बैठा उनका , बहकाने को और बात वो बनाता है
इक लाचार मुझ सा , अपनी तकलीफ को , सहते हुए मर जाता है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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