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**** अँखियों में प्यास है ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गज़ल/गीतिका

June 30, 2017

30.6.2017 प्रातः 5.21

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
कहते नही हो तुम अलग ये बात है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
रंगरंगत तुम्हारे चेहरे -महज उजास है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
दिल की लगी है ना कोई दिल्लगी है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
देदे दिलासा दिल को ये और बात है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
मायावरण-मोह दुनियां का डर जो है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
दर छोड़ दर-दर ना भटके डर जो है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
नाजुक है दिल बहुत ये ओर बात है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
मिलती नही है मौत मन-चाही बात है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
कहदे जुबां से ख़ुश हैं ये ओर बात है

अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है
अँखियों में प्यास है ये दिल उदास है।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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