Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Aug 2016 · 1 min read

मौन ही जब अर्थ देने लगे

मौन ही जब अर्थ देने लगे तो शब्द सारे ही अकिंचित हो जाते है

व्यथित मन जब द्रवित हो कुछ कहने चले

अस्रूओ की झडी जब चछु को धुंधला करे

तो शब्द सारे रूंध गले मे अटक कर खो जाते है

मौन ही ….

नयन ही करने लगे जब नयनो से बाते

धडकन ही सुनने लगे धडकनो की बाते

मौन ही जब मुखर हेकर प्रीत का पथ रोक ले

तो शब्द सारे ही मर्यादित हो जाते है

तो सचमुच शब्द सारे ही अकिंचित हो जाते है

Language: Hindi
469 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
राहों में
राहों में
हिमांशु Kulshrestha
23/28.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/28.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
फकत है तमन्ना इतनी।
फकत है तमन्ना इतनी।
Taj Mohammad
👺 #स्टूडियो_वाले_रणबांकुरों_की_शान_में...
👺 #स्टूडियो_वाले_रणबांकुरों_की_शान_में...
*Author प्रणय प्रभात*
हिन्दी के हित प्यार
हिन्दी के हित प्यार
surenderpal vaidya
मेरी निगाहों मे किन गुहानों के निशां खोजते हों,
मेरी निगाहों मे किन गुहानों के निशां खोजते हों,
Vishal babu (vishu)
इतना कभी ना खींचिए कि
इतना कभी ना खींचिए कि
Paras Nath Jha
ज़ीस्त के तपते सहरा में देता जो शीतल छाया ।
ज़ीस्त के तपते सहरा में देता जो शीतल छाया ।
Neelam Sharma
नज़र का फ्लू
नज़र का फ्लू
आकाश महेशपुरी
उसकी सूरत देखकर दिन निकले तो कोई बात हो
उसकी सूरत देखकर दिन निकले तो कोई बात हो
Dr. Shailendra Kumar Gupta
माता सति की विवशता
माता सति की विवशता
SHAILESH MOHAN
ए जिंदगी तू सहज या दुर्गम कविता
ए जिंदगी तू सहज या दुर्गम कविता
Shyam Pandey
💐प्रेम कौतुक-490💐
💐प्रेम कौतुक-490💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
*हनुमान प्रसाद पोद्दार (कुंडलिया)*
*हनुमान प्रसाद पोद्दार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
"बड़ा सवाल"
Dr. Kishan tandon kranti
ओढ़े  के  भा  पहिने  के, तनिका ना सहूर बा।
ओढ़े के भा पहिने के, तनिका ना सहूर बा।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
उसको देखें
उसको देखें
Dr fauzia Naseem shad
हर शेर हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी - संदीप ठाकुर
हर शेर हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
मूल्य मंत्र
मूल्य मंत्र
ओंकार मिश्र
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
पिया घर बरखा
पिया घर बरखा
Kanchan Khanna
ज़िंदगी
ज़िंदगी
नन्दलाल सुथार "राही"
मेरा केवि मेरा गर्व 🇳🇪 .
मेरा केवि मेरा गर्व 🇳🇪 .
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
माँ
माँ
Sidhartha Mishra
रोला छंद
रोला छंद
sushil sarna
ग़ज़ल
ग़ज़ल
नितिन पंडित
इश्क़ का दस्तूर
इश्क़ का दस्तूर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
प्रतिशोध
प्रतिशोध
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
तुम जो कहते हो प्यार लिखूं मैं,
तुम जो कहते हो प्यार लिखूं मैं,
Manoj Mahato
जमाने से सुनते आये
जमाने से सुनते आये
ruby kumari
Loading...