कवितागज़ल/गीतिकामुक्तकगीतलेखदोहेलघु कथाकहानीकुण्डलियाहाइकुबाल कविताघनाक्षरीतेवरीकव्वाली

दिल के भी हाल चाल मगर पूछते चलो

कितना भी तेज ज़िन्दगी में तुम चले चलो दिल के भी हाल चाल मगर पूछते चलो सपनों के साथ रिश्तों को है साधना तुम्हें अपनी खुशी या ग... Read more

कुण्डलिया ( आजादी की राह)

कुण्डलिया- १ ~~ प्राणों से रौशन हुई, आजादी की राह। हँसी खुशी इस हेतु ही, तज डाली हर चाह। तज डाली हर चाह, तभी आजाद हुए हम। उन... Read more

" जीवन के मधुगान हैं " !!

हलधर की बेटी ठहरी मैं , हँसी लगे पहचान है !! हरे भरे खेतों में रमती , वहन करूँ जिम्मेदारी ! हरी चुनरिया माँ धरणी की , उस पर म... Read more

मोबाइल तू है सब का साथी

है चमत्कार मोबाइल फोन बैठे रहो कौसो दूर बात होती चंद क्षणों में आधुनिक हो गया है आज मोबाइल बन गया है स्मार्ट... Read more

***साइकिल की शानदार सवारी ***

🏵 *प्रथम पाठशाला*🏵 *साइकिल की शानदार सवारी* बात उन दिनों की है जब मैं सन 1970 में प्रथम पाठशाला याने आज की *प्री नर्सरी* उस जमाने ... Read more

दुपट्टे पर एक गजल ---आर के रस्तोगी

दुपट्टे पर एक गजल दुपट्टा अब तो आउट ऑफ़ फैशंन हो गया | अब तो बेचारा ये फटकर बेकार हो गया || समझते थे कभी इसे शर्म-हया की नि... Read more

बर्थडे सेलीब्रेशन

‘टाफियों के पैकेटों को छोड़ कृपा कर इन सभी उपहारों को वापिस ले जायें’ अध्यापिका ने अत्यन्त विनम्रता से उस धनाढ्य पिता से कहा था जो अप... Read more

नारी का सम्मान होना चाहिए!!

विषय- नारी के प्रति सामाजिक विषमता विधा- गीत (मुक्तछंद) ------------------------------------- 【मुखड़ा】 कुप्रथा कुरीतियों का ,अं... Read more

मुक्तक

तेरी यादों के क़दम रुकते नहीं कभी। तेरी ज़ुल्फ़ों के सितम रुकते नहीं कभी। रोशनी ज़लती है हर दम अरमानों की- तेरी चाहत के वहम रुकते... Read more

आज के दोहे

आज के दोहे (जून 24, 2019) गौर जरा अब कीजिए, बिगड़ रहे हालात । इस युग को भाता नहीं, कहना सच्ची बात ।1। खोलो मुख को सोच के, द... Read more

जिन्दगी और मौत ---आर के रस्तोगी

चार दिन की है जिन्दगी,हंसी ख़ुशी से इसको काट ले | मत किसी किसी का दिल दुखा,तू दर्द सबके बाँट ले || कुछ भी नहीं साथ जाना,बस एक नेक... Read more

*"सच्चा प्यार"*

दूर हमसे जाने का ना करना कभी गम ! दर्द में हमारे कभी ना करना आँखें नम !! तुम्हारी ख़ुशी में ही हमारी हर ख़ुशी है ! तुम्हारी चाहत मे... Read more

कविता:- शब्द ब्रह्म है

शब्द ब्रह्म है ********** शब्द तो ब्रह्म है, शब्द शब्द में प्राण है। शब्द लक्षित होते, शब्द ही विज्ञान है।। शब्द से लिखी रा... Read more

कविता क्या है?

"कविता क्या है?" ------------------- फूलों महकी डार-सी,तारों के नभ दरबार-सी। दीपों के त्योहार-सी,ख़बरों के अख़बार-सी। हर जन मन की ... Read more

"सहारा हैं यादें" (कविता)

तन्हाइयों में ये यादें ही तो सहारा होती हैं हमारा असर करती है दोस्त बनकर बेकरार दिल को दे करारा हम दर्द... Read more

"दामाद का साथ" #100 शब्दों की कहानी#

त्रिवेदीजी की बड़ी बेटी की शादी हो चुकी , छोटी बेटी की भी सगाई होने ही वाली थी, उनका रिटायरमेंट था करीब । इसी बीच पत्नी एकाएकी सड़क... Read more

खयाल मेरा

भटका भटका सा हर शख्स नजर आता है मुझे जब से साधु हो गया है मन मेरा । बदला बदला सा संसार लगने लगा है मुझे जब से पाक साफ ह... Read more

कुण्डलिया

सूरत तेरी सामने , क्या मैं देखूं यार । मुझको प्यारा है लगे, बस तेरा दीदार ।‌। बस तेरा दीदार, सदा ही दिल को भा... Read more

एक ग़ज़ल

एक ग़ज़ल दूर सदा ही वो रहते हैं, उनको अपना रब कहते हैं। बस ग़म की बातों को छोड़ो, सुख में भी आंसू बहते हैं। बेशक ते... Read more

कुण्डलिया

जात धर्म हैं पूछते , नहीं लगे है लाज । अगड़े पिछड़ों में बंटा, सारा आज समाज ।। सारा आज समाज, भूल कर सब मर्यादा । कहें देश ह... Read more

ग़ज़ल

ज़ख़्म दिल के बहुत ही गहरे हैं हाँ मगर ये बड़े सुनहरे हैं ये निशानी हैं मेरे दिलबर की साँस बन कर जो मुझमें ठहरे हैं... Read more

झूठ न बोले दर्पण

दिनांक 24/6/19 दर्पण विधा - हाइकु हर तरफ परेशान इन्सान देखें दर्पण सुखी मानव आस है बरसात कहे दर्पण न बोले झूठ देख... Read more

" किस्मत में कहाँ छप्पन भोग " !!

आग बरसती बड़ी तपिश है , चमकी से चमके हैं लोग !! खड़े कुपोषण और गरीबी , भाषण से कुछ ना होगा ! स्वास्थ, चिकित्सा , शिक्षा सस्ती , ... Read more

गज़ल

हम इश्क में हो गये बरबाद इस शहर में हैं परिन्दे भी नहीं आजाद इस शहर में, हर तरफ बौने ही दिख रहें हैं हमको तो क्या नही कोई भी शम... Read more

जीवन में तपिश

दिनांक 24/6/19 विधा - हाइकु हर तरफ परेशान इन्सान घोर तपिश तपिश अंत बरसे बरसात सुखी जीवन नाराज सूर्य बरसती है आग ... Read more

राख़

जाके कोई क्या पुछे भी, आदमियत के रास्ते। क्या पता किन किन हालातों, से गुजरता आदमी। चुने किसको हसरतों , जरूरतों के दरमियाँ। ... Read more

ग़ज़ल- मिलती खुशियाँ नहीं ज़माने से

ग़ज़ल- मिलती खुशियाँ नहीं ज़माने से ■■■■■■■■■■■■■■ मिलतीं खुशियाँ नहीं ज़माने से, मांग लेता हूँ मैं वीराने से। बाप माँ तो खुदा सरी... Read more

श्रीभगवान बव्वा के दोहे

"श्रीभगवान बव्वा के दोहे" बच्चों को अब दीजिए, बड़ा ज़रूरी ज्ञान । मात पिता के हाथ में, बसते हैं भगवान ।। नये समय का खेल है, द... Read more

सैनिक की जिंदगी,

दिवाली पर न आऊँगा, उमंगों को सुला देना नहीं मिल पाई है छुट्टी अकेले घर सजा लेना यहाँ सरहद पे हम मिलकर बमों को खूब फोड़ेंगे हमारे ... Read more

सैनिक की जिंदगी,

दिवाली पर न आऊँगा, उमंगों को सुला देना नहीं मिल पाई है छुट्टी अकेले घर सजा लेना यहाँ सरहद पे हम मिलकर बमों को खूब फोड़ेंगे हमारे ... Read more

है! मेघ जल्दी बरस

धरा कर रही पुकार, है! मेघ करो उपकार, बरसाकर तुम नीर, मिटा दो सबकी पीर, सब ताक रहे आसमान, अब सहन नही तापमान, गरमी से सब बेहाल, ... Read more

जिद्दी मन

कहीं उडती हुई रेत का बबंडर थामने की जिद् है कहीं नफ़रत मे आमने सामने की जिद् है कहीं बद से बद्तर हो गई हैं यादों की बारिशें न ब... Read more

श्रीभगवान बव्वा के दोहे

आज के #दोहे, (जून 23,2019). मन के रथ पर बैठकर, करके आना सैर । साथी तेरे हैं सभी, नहीं मिलेगा ग़ैर ।1। टूटे दिल को जोड़ना, उ... Read more

श्रीभगवान बव्वा के दोहे

"श्रीभगवान बव्वा के दोहे" बच्चों को अब दीजिए, बड़ा ज़रूरी ज्ञान । मात पिता के हाथ में, बसते हैं भगवान ।। नये समय का खेल है, द... Read more

एक दादा द्वारा अपने पोते को लिए लिखा एक काव्यात्मक पत्र। हिंदी और अंग्रेजी में.

एक दादा द्वारा अपने पोते को लिए लिखा एक काव्यात्मक पत्र। अंग्रेजी और हिंदी में. . प्रिय नन्हें वेद, अब तुम कुछ बड़े हो गए हो और... Read more

बाम पर बेनक़ाब बैठे हैं

करने ख़ाना खराब बैठे हैं बाम पर बे नक़ाब बैठे हैं वो जो चुप-चूप जनाब बैठे हैं लेके वो इन्क़लाब बैठे हैं कल तलक शान थे जो महफिल ... Read more

प्रश्न

दिल नहीं मानता कि ........ इन्साँ जानवर से हो गए । और जानवर इन्साँ से हो गए ।। बदल लिया है दोनों ने खुद को खुद से । थ... Read more

देश में बढती बेरोजगारी

बेरोजगारी दूर करना के उपाय : - 1 नौकरी पर निर्भरता कम करे 2 कोई काम छोटा नही होता छोटे व्यवसाय से काम शुरु आत करें 3 तक... Read more

ट्रेन का सफ़र

दूर एक मकान.. खेत में मचान.. अनगिनत पेड़.. बिजली की खंबे.. मुँह चलाती गाय.. हवा की सांये सांये.. पतंग उड़ाते बच्चे.. नीं... Read more

अंतर्विरोध

अंतर्विरोध का दौर है, अपने आप से उलझना है.. जीवन की इस पहेली को, अपने अंदाज़ से समझना है.. उड़ने कि तैयारी में.. यूँ ही हाथ ... Read more

उधेड़बुन

अंतरदवंध है क्यों प्रबल.. मरीचिका है क्यों सबल.. खुद ही मैं रथी.. मैं ही आप,क्यों हूँ सारथी.. और उस पर समय की ये गति.. भीड़... Read more

जिंदगी से मुलाक़ात

अभी कल ही.. गली के मोड़ पर.. अचानक मिली जिंदगी.. थोड़ी मुस्कान का आदान प्रदान.. हाय हैल्लो.. पुरानी परिचित सी.. लगी जिंदगी... Read more

मरीचिका

गरम लू की तपिश.. हवा की तरंगों में कुछ. लिख जाती है.. ये लिखावट, कुछ जानी पहचानी लगती है.. कुछ बताना चाहती है.. शायद ये ... Read more

खिड़की

एक दूर अकेले मकान में.. एक खिड़की है सुनसान में.. कई दिनों से खुली नहीं.. धूल जमी है किनारों पर.. कई सदियों से वो धुली नहीं..... Read more

खिड़कियां

कभी कभी लगता है.. एक ख्याल जगता है.. हम सब मग्न है... सीमित हैं.. अपनी अपनी खिड़कियों में.. इन्ही खिड़कियों से ही.. हम चुर... Read more

मांझी अकेला

भवनाओं के उथले सागर में.. भारी सी नाव लिए.. चाहत की टूटी गागर में.. राहतों का ख्याल लिए.. सागरमंथन की लालसा में.. कमजोर पतव... Read more

तलाश

शब्दों के सितार कभी कभी.. अपने आप चल पड़ती हैं उंगलियां.. सुस्ताई सी. अलसाई सी. कोई धुन.. खोल देती है दिल की बंद खिड़किया. जिं... Read more

शाम

अभी अभी शाम ढल गई.. तपिश की ये चादर.. अलसाई सी रात ने ओढ़ ली.. शाम जाते जाते.. थोड़ा अंधेरा भर गई.. शाम का यूँ चुपचाप.. अ... Read more

सफ़र

मंजिल का पता नहीं.. सफ़र कभी रुका नहीं.. रूह को सुकून मिले.. ढूंढे एक ऐसी ठौर.. बेवजह मुस्कान लिए.. बढ़ रहा उस और.. उबड़ खा... Read more

चाँद से मुलाक़ात

दिन भर की गर्मी के बाद.. सुखी धरती पर.. तेज हवाओं के साथ बरसात.. कुछ राहत दे गई.. पर.. बत्ती गुल कर गई.. बाहर बालकोनी में.... Read more