कवितागज़ल/गीतिकामुक्तकगीतलेखदोहेलघु कथाकहानीकुण्डलियाहाइकुबाल कविताघनाक्षरीतेवरीकव्वाली

आम हो गई है जलन

आम हो गई है जलन ------------------------ आम हो गई है जलन देख सीने लगे अगन हैं सभी खुद में मग्न मना रहे हैं सभी जश्न रहने ... Read more

प्रिय बिन...

फिरता- रहता मारा- मारा प्रिय बिन सूना ये जग सारा पल को जिया सदी में हमने प्रिय बिन सांस लगी थी थमने प्रिय बिन कैसे समय गुज़ार... Read more

सागर किनारे

सागर किनारे खड़ी इक नदी सदी से इंतज़ार कर रही है मिलन हो ना पाया सागर से अब तक मैं तड़पूंगी कब तक ... Read more

पकड़

लघुकथा शीर्षक - पकड़ ======================== सड़क पर हो रहे तमाशे ने मुझे अपनी और आकर्षित किया, तो मै उस ओर खिंचता हुआ अनायास ही... Read more

आडम्बर का पिण्डदान

हमारे भारत देश में वेद,पाठ-शास्त्रों का बहुत ही महत्व है,अपने आप में भारत ही विश्व में एक इकलौता देश है,जहां पर अनेक देवी देवता मानव... Read more

मोर नजर म बिलासा मंच

मोर नजर म बिलासा मंच ज्ञानी पंडित मन ह हमला पढ़ाते, दोहा छंद,गीत, कविता ल सिखाते। सबले सुघ्घर, सबले बढ़िया हावय, मोर नजर म बिलास... Read more

परिवार

परिवार एक गांव में सोनुराम नाम का वृद्ध रहता था।उसके नौ बेटी और चार बेटा रहता है ।परिवार बहुत बड़ा था। परिवार का लालन पालन खेती म... Read more

पेड़ को न काटो

कहानी- पेड़ को न काटो लेखक - डिजेन्द्र कुर्रे (शिक्षक) एक छोटा सा गाँव की कहानी है।जहाँ लगभग500 लोग निवास करते थे।चारो तरफ हरियाल... Read more

बढ़ते वीर सैनिक

मनहरण घनाक्षरी - बढ़ते वीर सैनिक सर पे कफ़न बाँधे, हाथ में बंदूक ताने। बढ़ते वीर सैनिक,आतंक को मारने। भगत भी कहते थे,शेखर भी कहत... Read more

जीत

मनहरण घनाक्षरी -- जीत बहती धारा के साथ, किनारे चल छोड़ के। रखे यकीं खुद पर, दम तो दिखाओगे। बिना लक्ष्य मंजिल के, हासिल कै... Read more

पावन हो आराधना

कुंडलियाँ - पावन हो आराधना ~~~~~~~~~~~~~~~~ पावन हो आराधना, मन मे उपजे प्रीत। तब गूँजे मनभाव में, मानव... Read more

देशभक्ति

" पापा मुझे भी तिरंगा झंडा दिलवाओ ना , कल स्कूल में सब बच्चों के लिए मुझे ही ले जाना है। " मनीष ने कहा । " हाँ बेटा चलो अभी दिल... Read more

धूप को तरसते गमले

बदल गए लोग, बदल गए भोग, नहीं रही वो हवा, नहीं रही वो दवा, नैतिकता बेअसर, घुला मजहबी जहर, भूल गए सब शांति, जगह जगह अशांति, बच... Read more

ग़ज़ल

खुद को तुम समझाकर तो देखो दर्द में भी मुस्कुराकर तो देखो जरूरतें हो जाएंगी कम तेरी भी ईमानदारी से कमाकर तो देखो बढ़ जाएग... Read more

*** " आओ सोंच के देखें जरा........! " ***

* जिंदगी के कई रंग देखो , बे-तुका जीवन जीने के ढंग देखो। कहीं है , मौज-मस्ती ; ... Read more

झंडे का सत्कार किया करते हो

कहने को तो झंडे का सत्कार किया करते हो तेरा मेरा कहकर फिर तकरार किया करते हो जग में देखो ईश्वर ने कितने प्यारे रंग भरे नीले... Read more

कब आओगे ?

बोलो ना ! कब आओगे ? इस बेजान जिस्म को कब तक रुलाओगे छोड़कर चले तो गए हो बता भी देते ! कब आओगे ? वैसे तो किस्सा वही है हमा... Read more

आइन

आईन के मुहाफ़िज़ सड़को पे लड़ रहें हैं तालिब मुहब्बतों के तख्ती लिए खड़े हैं हर एक का वतन ये हर एक का चमन है हिन्दोस्तां के बुलबुल मशा... Read more

आहट (लघुकथा)

आहट (लघुकथा) ----- शाम को चाय पीते वक्त जब तारा ने अपनी सास की साँस फूलती हुई देखी तो कहा- अम्मा जी आप अपने खान-पान का ध्यान रखा क... Read more

सन्नाटा (लघुकथा)

सन्नाटा (लघुकथा) ऑफिस में गार्ड की नौकरी करने वाले राम बाबू को उदास बैठे देखकर मैंने पूछा- क्या हालचाल है रामबाबू? तबियत तो ठीक है?... Read more

माँ का गणित (लघुकथा)

माँ का गणित --------- दोपहर दो बजे चिलचिलाती धूप में चार किलोमीटर साइकिल चलाकर जब मोहन घर पहुँचा तो देखा माँ पहले से पानी का ग्ला... Read more

भटकता बचपन ( लघुकथा)

भटकता बचपन नव्या ज्यों ही ट्यूशन पढ़कर अपने घर के दरवाज़े पर पहुँची,पड़ोस में रहने वाला चार साल का बच्चा-प्रखर दौड़ता हुआ उसके पास... Read more

आइना (लघुकथा)

आइना दरवाजे की डोरबेल बजी तो भानु ने अपनी मम्मी से कहा-लगता है, दरवाजे पर कोई आया। उसकी माँ ने कहा-बेटा जाकर देखो तो कौन है ? ... Read more

"कितना बदल गया इंसान"

एक हसीन लडकी राजा के दरबार में डांस कर रही थी... ( राजा बहुत बदसुरत था ) लडकी ने राजा से एक ... Read more

ऊँचाई ( लघुकथा)

ऊँचाई (लघुकथा) विशाल के पिता की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पढ़ाई-लिखाई में उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। वह समय ... Read more

अंतर सोच का (लघुकथा)

अंतर सोच का ----------- विद्युत विभाग में नौकरी लगने के बाद गाँव से लखनऊ आकर बसे वर्मा जी जिनके दो संतानें थीं - पहली बेटी,जो बड़ी... Read more

कविता पर टैक्स (लघुकथा)

कविता पर टैक्स- -------------------- विद्रोही जी ने सरस जी को फोन किया और कहा-अरे सरस जी,ज़रा टी.वी.खोलो और समाचार चैनलों पर चल ... Read more

बेड़ा गर्क ( लघुकथा)

बेड़ा गर्क- -------------- हैलो ,हैलो,सीमा ने चहकते हुए अपनी सहेली यामिनी से फोन पर कहा - आज मैं बहुत खुश हूँ। यामिनी- वह तो तुम्... Read more

फ़र्क (लघुकथा)

फ़र्क- मेधा को अपने मायके से आए हुए अभी एक घंटा ही हुआ था कि फोन की घंटी बजी।मेधा ने फोन उठाया-हैलो, कौन?उधर से आवाज़ आई,बहू मैं आप... Read more

राम जी का सपना (लघुकथा)

राम जी का सपना ----------------------- ब्रह्म मुहूर्त में पवनपुत्र ने कहा-प्रभु उठो।क्या हो गया आपको?पवनपुत्र की आवाज़ सुनकर प्रभु... Read more

आँचल ( लघुकथा)

लघुकथा- आंचल भव्या दो बजे स्कूल से आकर अपनी माॅम के आॅफिस से घर वापस आने का बेसब्री से इंतजार कर रही है क्योंकि उसे अपनी माँ से ... Read more

तन-मन स्वच्छ बने

निश्छल होता मन नहीं,भेजें पर संदेश। प्रथम वरण हम ही करें,बदले फिर परिवेश।। नीति नियम दो देखिए,पर खुद के हैं और। ये तो मानवता नह... Read more

काला खून

काला खून -------- शाम को रामलाल अपने साहब मुखर्जी से मिलने के लिए चला तो उसका दस साल का पुत्र रमेश भी उसके साथ चल दिया ।मना करने... Read more

" नवल नवल से पात हैं " !!

गीत हाड़ काँपते , सर्दी ऐसी , शरद ऋतु की रात है !! ठिठुर गये हैं , दिनकर देखो , अलसाई सी धूप है ! कहीं धुंध में भोर खो गई , ... Read more

रेडीमेड नुस्खा

रेडीमेड नुस्खा (लघुकथा) बनवारी लाल मस्ती में झूमते हुए मार्निग वाॅक कर रहे थे, तभी उनकी मुलाकात परम मित्र सूरजमल जी से हुई, जो कुछ... Read more

छुट्टी

छुट्टी -------- रविवार को जब सुबह के 9 बज गए तो सुधा ने अपने पति राकेश को जगाते हुए कहा, अजी उठो भी अब, कब तक सोते रहोगे? राकेश ... Read more

"हौसला बुलंद"

कमजोर ना बना इस तरह जिंदगी को ये जाने दिल जल्द आयेगा खुशी का पल चलो हम मुस्कुराहट से शुरुआत करते है Read more

ना खता हमारी ना खता तुम्हारी

ना खता हमारी ना खता तुम्हारी -------------------------------------- ना खता हमारी ना खता तुम्हारी घड़ी की सुइयों का यह कसूर है न... Read more

भीष्म पितामह

*भीष्म पितामह* गंगा पुत्र भीष्म खास रच गये इतिहास। पिता सुख धर्म मान प्रतिज्ञा संकल्प है। ब्रह्मचार्य पालन का सत्ता सुख मानव... Read more

एक कप चाय

जब जब तेरी याद आती है एक कप चाय पी लेता हूँ फिर मुलाक़ात होगी शायद यही सोचकर थोड़ा और जी लेता हूँ बस एक कप चाय पी लेता हूँ ए... Read more

मुक्तक

अमीरी नर्म बिस्तर पर गुजारे शौक़ से जीवन। ठिठुरती रात में बेबस पड़ा फुटपाथ पर निर्धन। कराहा कर्ज से जितना सताया सर्द ने उतना- क... Read more

मेरा प्यारा अंगना

है बच्चे अंगना की शोभा खेले जब आँगन में खुशियाँ भर दे जीवन में बिटियां का आँगन गुड्डे-गुड़िया का ब्याह बेटे का ... Read more

मुक्तक

उम्र पढ़ने खेलने की माँगते हैं भीख क्यों? देश के भावी धरोहर पा रहें ये सीख क्यों? बेबसी से हो विकल ये बाल मन कुत्सित हुआ, मुख ... Read more

मुक्तक

कड़कड़ाती ठंड में वो काँपते नंगे बदन। भूख से बेकल हुए क्यों आज ये मासूम मन। पात्र भिक्षा का लिए बचपन खड़ा है राह में- दृश्य ऐसा... Read more

बिन तेरे

एक एक दिन गुजर रहा हैं मर नहीं जाएंगे, बिन तेरे, हवा में न नफ़रत का ज़हर साँस भी ताजी हैं, बिन तेरे, ख्वाब होता तो राते... Read more

हर बार पूछती हो '' कैसे हो '' -3

बम्बई 21 जून 1983 प्रिय " स्वरा " पिछले कई एक दिनो से मैं तुम्हारे पत्र की प्रतिक्षा मे था । आज भी आधा दिन गुजर जाने के बाद ... Read more

राजनीति मे आम

पके नही ईमान का, राजनीति मे आम ! चाहे जैसा डालिए, उसमे खाद तमाम !! डरते हो तुम व्यर्थ ही ....,मरने से इंसान ! मर तो उस दिन ही ग... Read more

शीर्षक- "प्रीत पुरानी" (कविता)

यादों के पिटारे को दिल से टटोलने लगी हूं अब कुछ पल मैं अपने लिए जीने लगी हूं! रात के अंधियारे हो या दिन के उजाले हो हर सुख-दु... Read more

*** " हम तीन मित्र .........! " ***

* मेरे दो मित्र , शेखर और विशाल , तीसरा मैं स्वयं काँजीलाल । थे ' माँ-बाप ' के एक अकेला-लाड़ला संतान ,... Read more

आँधियों से जंग

हुए बदनाम हम फिर भी मोहब्बत के थपेड़ों में अकेले चल नहीं पाए समझदारों के मेलों में शहर की आँधियाँ क्या रोकेंगी मुझे फिर प्यार ... Read more