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साक्षात्कार- राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”- लेखक, एहसास और ज़िन्दगी- काव्य संग्रह
हरियाणा के शिक्षा विभाग में हिन्दी प्रवक्ता पद पर कार्यरत राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम” जी की पुस्तक “एहसास और ज़िन्दगी- काव्य संग्रह“, हाल ही में साहित्यपीडिया... Read more
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भव्य विमोचन- डॉ अर्चना गुप्ता द्वारा रचित
25 दिसम्बर 2017 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर में डॉ अर्चना गुप्ता द्वारा रचित ग़ज़ल संग्रह “ये अश्क होते मोती” का भव्य विमोचन समारोह... Read more
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साक्षात्कार- जे पी लववंशी- लेखक, मन की मधुर चेतना- काव्य संग्रह
मध्य प्रदेश के हरदा जिले के रहने वाले, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग म.प्र. शासन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जे पी लववंशी जी की पुस्तक... Read more
दरारें दिल की
दरारें दिल की हल्की दरारें दिल की इतनी गहरी होती है अंधी खाई हो जैसे गंगा जमुना बह कर पसर जाए सोख लेती नदियों को... Read more
अभिलाषा
कुछ किया नहीं ऐसा,पर विशिष्ठ स्थान मिले, ऐसी चाहत लिये जी रहा हूँ मैं। शुभ कामनाओं को ओढे,कल्पना लोक में रहकर, यथार्त के धरातल पर... Read more
हरियाणवीं लोककवियों का कालक्रम
म्हारे लोक कवि एवं सांगी.....कालक्रमानुसार ................................................................... 1, किशन लाल भाट - ( 1700 ई. के आसपास ) 2. सादुल्ला – ( 1760 का दशक )... Read more
मुक्तक
आप जबसे जिन्दगी में मिल गये हैं! रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं! जागे हैं ख्वाबों के पल निगाहों में, जख्म भी जिगर... Read more
गजल
*"गजल"* जी चाहता है खुलकर रोये पर ना जाने क्यों, बिना बरसे ही आंखों से घटाएँ लौट आती है। महकती गुनगुनाती हैं हवाएं मुझे लगता... Read more
5 लाल हमने खोये
5 लाल हमने खोये नए साल का था आगमन,औऱ खुशियां थी चहुँ ओर। कहीँ मिठाई बट रही, ढोल नंगाड़ो का था कहीं शोर।। नाच गा... Read more
बेटी की अहमियत
Sushma Malik लेख Jan 19, 2018
'​बेटी की अहमियत​"​ मुझे गर्व है कि मैं बेटी हूं और मुझे सौभाग्य भी प्राप्त है कि मेरी दो बेटियां है। हम पढ़ लिखकर बहुत... Read more
अ मेरे हमराही
तेरे आने से महक जाती है फिजाएं मेरी, तभी रूबरू होकर तेरा दीदार करती हूँ। लगे न बुरी नजर तुझे अ मेरे हमराही, तभी इस... Read more
दर्द
"दर्द" देखा है मैंने इस जमाने को, मेरे दर्द में मुझे सताते हुए। लाख कमिया निकाली और, मुझे ही बुरा बताते हुए।। लाखों थपेड़े खाये... Read more
हिसार कांड
"हिसार कांड" जिस देश मे नारियां "देवी" सोची जाती है। हर रोज वहाँ पर क्यों बेटियां नोची जाती है।। कभी दिल्ली कभी हिसार में,हवस की... Read more
निर्भया v/s गुड़िया
निर्भया v/s गुड़िया देने दिलासा उस माँ को, अब राजनीतिक पार्टी आएंगी। चन्द पैसो में क्या वो उसकी, गुडिया को लौटा पाएंगी।। कोई दस लाख... Read more
मासूम बेटी
"मासूम बेटी" दरिंदा ने बणाई योजना, उनकी करणी पार गयी। छः साल की मासूम बेचारी, अपणी जिंदगी हार गई। कूड़ा बीन के करै गुजारा, पाल... Read more
बेटी
​ ​ "बेटी"​ ​मैं नही चाहती कि मेरे देश की किसी बेटी में​ अकारण भरा हुआ अभिमान हो। चाहती हूँ कि हर बेटी में पूरीतरह​... Read more
तेरे चेहरे का नूर
​"तेरे चेहरे का नूर"​ तेरे चेहरे का नूर, मेरे दिल को हुजूर, सुकून दे गया। तेरा नजरें मिलाना, फिर मुस्कुराना, मेरा चैन ले गया। ​... Read more
नारी का सम्मान
"नारी का सम्मान"​ इंसान तभी कहलाओगे, जब नारी का सम्मान करो, अबला समझकर उसको, ना उसका अपमान करो। :-वो माँ भी तो 1 नारी है... Read more
गारी धुन
भारत माता खो,तुम सब बचालो। नेतर हुइहे गुलाम मेरे लाल........ वीर भगत ने कुर्वानी, उनखे तुम सलाम मेरे लाल ........ आज भारत मुश्किल आई, नेतर... Read more
तुम मेरे कौन हो????
"​​तुम मेरे कौन हो" लाख कोशिश करती हूं , लेकिन समझ नही पाती हूँ। ​ ​कि ​​तुम मेरे कौन हो? जितना सुलझाती हूँ,​ ​उतनी उलझती... Read more
इंद्रधनुष
इंद्रधनुष - एक संवाद दूर कहीं एक टूटे फूटे घर में जहाँ गरीबी की परिभाषा भी शरमाती थी माँ गोद लिए बैठी थी अपनी इकलौती... Read more
इंद्रधनुष
इंद्रधनुष - एक संवाद दूर कहीं एक टूटे फूटे घर में जहाँ गरीबी की परिभाषा भी शरमाती थी माँ गोद लिए बैठी थी अपनी इकलौती... Read more
आईना बोल उठा
"आईना बोल उठा" मैं आई जब आईने के सामने तो आईना बोल उठा, ये भेद मेरा खोल उठा, के आईना बोल उठा। खुशियों की थी... Read more
गज़ल
जी चाहता है खुलकर रोये पर ना जाने क्यों, बिना बरसे ही आंखों से घटाएँ लौट आती है। महकती गुनगुनाती हैं हवाएं मुझे लगता है,... Read more
क्या लिखू?
मैं ने सोचा आज एक नायाब कविता लिखू सोचा तो किस पर लिखूं सोचा चांद पर लिखूं सदियों से जिसकी उपमा दी जाती है प्रिया... Read more
शाम होते ही
हर सुबह वो प्यार के मोह में घुल जाता है। शाम होते ही वो फिर से बदल जाता है।। दिन में लगता है वो खिलता... Read more
जिंदगी
कभी तप्त धूप सी, तो कभी सघन छाया है जिंदगी। है मेरी समझ से परे, न जाने क्या माया है जिंदगी। कभी हँसी की फुहारें,... Read more
*रिझाया तो बहुत*
रिझाया तो बहुत मग़र ,नहीं पयामों के पाबन्द निकले। बाँहें उठा के दिखाया तो बहुत ,मग़र नहीं पसन्द निकले।। मेरी फुंगाँ को कभी सुना तुमने,यार... Read more
पुस्तक समीक्षा-मयूर पीड़ा
Manoj Arora लेख Jan 19, 2018
कवयित्री : पृथा वशिष्ठ पुस्तक समीक्षक : मनोज अरोड़ा प्रकाशक : साहित्य चन्द्रिका प्रकाशन मूल्य : 175/- प्रत्येक इन्सान के हृदय में विचार चलते रहते... Read more
पुस्तक समीक्षा : ‘सलवटें‘ काव्य-कृति
Manoj Arora लेख Jan 19, 2018
पुस्तक-सलवटें ‘काव्य-कृति’ कवि-जयपाल सिंह यादव समीक्षक-मनोज अरोड़ा पृष्ठ-132 मूल्य - 225/- प्रकाशक-साहित्य चन्द्रिका प्रकाशन, जयपुर टकरायेगा नहीं आज उद्धत लहरों से, कौन ज्वार फिर तुझे... Read more
पुस्तक समीक्षा-शजर थकते नहीं ‘काव्य-कृति’
Manoj Arora लेख Jan 19, 2018
हृदय को छूती कविताएँ......... कवयित्री-राज गुप्ता पुस्तक-शजर थकते नहीं पृष्ठ-196 प्रकाशक-साहित्य चन्द्रिका प्रकाशन, जयपुर ‘चलते रहने का नाम जीवन है, थम गए तो भला किस... Read more
‘भाषण’ लघुकथा
एक मोहल्ले के कुछ युवकों ने मिलकर रक्तदान समिति बनाई और शहर के निजी ब्लड बैंक के सहयोग से एरिया सामुदायिक हॉल में रक्तदान शिविर... Read more