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साक्षात्कार- जे पी लववंशी- लेखक, मन की मधुर चेतना- काव्य संग्रह
Sahityapedia Blog Nov 23, 2017
मध्य प्रदेश के हरदा जिले के रहने वाले, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग म.प्र. शासन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जे पी लववंशी जी की पुस्तक... Read more
मुक्तक
मुझसे किसलिए तुम रिश्ता तोड़ गये हो? मेरी चाहत को तन्हा छोड़ गये हो! यादों की आहट रुला देती है मुझको, #साँसे_जिस्म को गमों से... Read more
"शिखर पर" शिखर पर आकर जब सूर्यास्त होगी, यही मेरी आख़री शिकस्त होगी। ना होगी माँ की ममता ना पिता का साया हर तरफ होगा... Read more
*🦋सतरंगी तितली🦋*
Sonu Jain कविता Nov 23, 2017
*🦋सतरंगी तितली🦋* रंग बिरंगी सुंदर तितली,, किस जहान से आई हो।। मेरे घर आँगन में आकर,, शोभा तुमने बढ़ाई हो।। प्यारा रूप सलोना तेरा,, पंखो... Read more
राहगीर
शब्द - मुसाफिर हे पंथी,राही,अथक राहगीर पथ भूल न जाना पथिक कहीं । सुन पथ में बहुत हैं तीक्ष्ण शूल, तो कष्ट अत्यधिक होंगे हीं।... Read more
प्रीतम से मिलन
बड़ा अजीब था वो तेरा पहली बार मिलना गुफ्तगू,इधर-उधर की बातें धीरे-धीरे मुलाकात बड़ी फिर एहसास बड़े अचानक एक दिन हाथ तेरा ले हाथों में... Read more
आशिक
दिल में चाहत छुपाये मिलने को तुझसे चाहे बावला सा हैं कँहा कुछ जानता हैं ये गगन,अम्बर छूने को चाहे नदियाँ, पर्वत, चाँद,तारे लाने को... Read more
करवटें
समय भी लेता रहता करवट दिन- प्रतिदिन वक़्त- बेवक्त मानव आकलन करता रहता समय की करवटें झेलता रहता । महँगाई, अत्याचार व अनाचार सहता परतंत्र... Read more
मैं आम आदमी हूं
में आम आदमी हूँ (कविता) में आम आदमी हूँ. मुझे मेंरी अभिव्यक्तियों को बेचना नही आता. शब्दो के बाजार मे बिकना नहीआता. सु:ख-दु:ख. ईर्षा-द्वेष. धर्म-कर्म.... Read more
मुक्तक
कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है! मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की? जब शामे-तन्हाई... Read more
एक रोचक कहानी -------प्रायश्चित
प्रायश्चित शीतकाल प्रारम्भ है, रात्रीकी चादर सुबह का सूरज धीरेधीरे समेट रही है। उसकाप्रकाश दरवाजे की झिर्रीयों से छन-छन कर अंदर होने का अहसास करा... Read more
अलसुबह
अलसुबह मैं फिनिक्स बनकर उठ खड़ा होता हूँ अपने अस्तित्व को निखारने के लिए ! दिनभर जद्दोजहद में लगे रहते हैं मेरे ही चाहने वाले... Read more
प्रेम
मेरी कलम से... कागज के किनारे तुम इंतज़ार करना मैं भेजूंगा इस छोर से हृदय की नौका में कविता को माँझी बनाकर प्रेमजल के सहारे... Read more
तिमिर
तिमिर सुन,स्याह तिमिर के पीछे देखो,झांक रहे हैं उजियारे हटाकर घटा तम की,कर उजास अंधियारे जो गलियारे। क्यों चुरा बैठी है अमा तू झिलमिलाते चांद... Read more
सर्दी
प्रत्यावर्तन मानसून का मौसम में बदलाव हर ऋतु में सिहरन छायी सर्दी का ठहराव | एसी कूलर दुबक गये सब , कम्बल बाहर आये |... Read more
मुक्तक
मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है! मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है! चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी, मुझको याद... Read more