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"माँ" काव्य संग्रह रचना सूची - साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता 2018

साहित्यपीडिया काव्य संग्रह "मां" के लिए रचनाओं का चुनाव कर लिया गया है। हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक रचनाओं को इस संग्रह में शामिल... Read more

ज़िन्दगी से दूर कितना भी हटा देना हमें

ज़िन्दगी से दूर कितना भी हटा देना हमें पर नहीं आसान यादों से विदा देना हमें जब हमारी जीत में ही बस तुम्हारी जीत थी क्यों गँवा... Read more

पृथ्वी है तो हम हैं (पृथ्वी दिवस पर विशेष)

दिनांक 22/4/19 लेख - पृथ्वी है तो हम है आज विश्व में यह विषय गंभीर चिंतन और चर्चा का है कि पृथ्वी को कैसे बचाया जाए । अगर हम ... Read more

मधुशाला

हमारी जिन्दगी तो है यहाँ पर ऐसी मधुशाला जरूरी है जहाँ पीनी सभी को मौत की हाला दिखाती खेल साकी बन हमेशा ही हमें किस्मत पिलाये... Read more

गीत- नहीं पूर्वजों की सहेजी निशानी

गीत- नहीं पूर्वजों की सहेजी निशानी ★★★★★★★★★★★★★ शिला की तरह टूटते जा रहे हैं कि रिश्ते सभी छूटते जा रहे हैं न दादा के रिश्त... Read more

बेटी ने सिखाया बचत का सफर

लघुकथा दिनांक 22/4/19 " संध्या की विदाई हो गयी थी , आँखो से आंसू रूक नहीं रहे थे । घर में सन्नाटा हो गया था " , नहीं तो :... Read more

राजनीति पर दोहे

राजनीति के मंच पर, कैसे कैसे खेल गठबंधन में दिख रहे, उल्टे सीधे मेल राजनीति के सामने, जनता है लाचार कैसे होगा देश का, अब ऐस... Read more

अवन्ति दर्शन

अवन्ति की धरती पावन, होता हर दिन यहाँ सावन । इस माटी को मेरा नमन, जहाँ आए श्री भगवन । देखो ऋषि सांदीपनि का आश्रम , यही पढ़े ... Read more

पांच सालो के बाद ,तुम यहाँ नजर आये --आर के रस्तोगी

(अखियों के झरोखे से ,जब देखा तुझे सांवरे | तुम मुझे नजर आये ,बड़ी दूर नजर आये |गीत पर आधारित पैरोडी ) तुम पांच सालो के बाद,| तु... Read more

क्योकी धनवान कहाते हो।

पैसे से खेल खेलने वाले, क्यों पैसो से मुझको तौल रहे । विश्वास मुझे है धनी हूँ मैं । कैसे गरीब तुम बोल रहे। हो सकता है कम... Read more

कीमती आपका वोट

कीमती आपका वोट -------------------------- कीमती आपका वोट है,देना इसे ज़रूर। लोकतंत्र का उत्सव यही,समझो इसे हुज़ूर।। सोच समझकर देना... Read more

नेता गण

"घाट घाट और राह राह पर ,घूम रहे हैं नेता गण , कैसे फिर से लूटा जाये ,सोच रहे हैं नेता गण! गिरगिट जैसे रंग बदलता ,पार्टी बदलते नेता... Read more

हमेशा फूँक कर पग मैं चली हूँ

हमेशा फूँक कर पग मैं चली हूँ उलझ हर बार पर फिर भी गिरी हूँ न चारागर न हूँ कोई दवा मैं मिटाना दर्द अपना जानती हूँ जला जो... Read more

जीवन रंगमंच

तीन विधाओ का नया प्रयोग विधा - छंदमुक्त कविता 1 दुनिया है एक रंगमंच खेल खिलाता है ईश्वर कभी खुशी तो कभी गम कभी गैर अ... Read more

तलाश अभी जारी है

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव आ गये। नेता अपने घर से निकल कर मंचो पर सजने लगे हैं।उनकी इन बातों से उपजी यह कविता:- ----------------------... Read more

भटकता इंसान

एक नई दुनियांं की तलाश में भटकता इंसान । वर्तमान को नकारता भविष्य की खोज करता इंसान । सुकून की लालसा में जगत से निकल भागता इ... Read more

ऐसे बेटे से औलाद न हो

" पापा , सोमेश के बिजनेस के लिए अभी दो लाख रूपये चाहिए । अगले महिने हम लौटा देंगे , जिससे पैसे लेना थे वह विदेश गया है , अगले महिने ... Read more

गर्मी की छुट्टियों में अपने बच्चों को देख लेने दो खुला आसमान

जी हां पाठकों, आपके बच्‍चों की वार्षिक परीक्षा के बाद सालाना छुट्टियां करीब हैं और आप हमेशा की ही तरह मशरूफ होंगे, बच्‍चों की फुर्स... Read more

माला की महिमा पर कुछ कुंडलियाँ ---आर के रस्तोगी

माला में बहुत गुण है, सदा राखिये पास | मंच पर चढ़ने के लिये ये है एक गेट पास || ये है एक गेट पास,तभी तो माला डालोगे | माला डालने... Read more

कविता

सिसकते वृक्ष बना मानव धरा दानव सिसक हर वृक्ष कहता है, घुटन जीने नहीं देती भयावित वृक्ष रहता है। हरित आभा धरा को दे किया श्रृं... Read more

जिऊं तो सुहागन मरु सुहागन

सोलह बारे बरत रखूं न हो‌ कोई चुभन फल में मांगू जिऊं तो सुहागन मरु तो सुहागन। मैं सजती तब थी जब सँवरती नहीं थी मेरा सँवरना जैसे ... Read more

" खुशियों के पल साँचे हैं " !!

कोई बंधन बांध न पाये , तब मन मयूर नाचे है !! पावस ऋतु जब मन हरषाये , हरी चुनरिया को लहराये , लेता मौसम अंगड़ाई है , खुशियों के... Read more

मेरा यार है वो

खुदा ने जो भी दिया मुझे उसमे सबसे नायाब है वो मैं तो तप रहा था मरु की तरह वो आसमां से आती बूंदों का बौछार है वो टूट कर बिखरने... Read more

तुमने पुकार कर

देखा नही कभी मुझे तुमने पुकार कर मैं लौटता चढ़े हुए दरिया को पार कर है कैसी आग ये लगी उठता रहा धुआँ जाए कहीं नहीं मुझे ये खाकसार... Read more

मीरा....

सात वर्षीय मीरा की आँखों मे चमक और चेहरे पर खुशी देखकर मन जितना प्रसन्न था उससे कहीं ज्यादा उसके कोमल हृदय मे प्रेम और मानवता देख मै... Read more

उन्हें समर्पित

जब तेरी याद में तन्हा लिखने बैठ जाता हूं । तेरी कसम शायर बन जाता हूं !! दिल को दीवाना तूने बनाया इस कदर !! चांद में तेरी सूरत ... Read more

आजादी और हम

इस आधुनिक युग में हम आज इतना आगे निकल गए हैं, जिसकी सीमा का हमें पूर्णता ज्ञान नहीं रह गया है हम और आगे-और आगे, आज,बढ़ने की तरफ विचा... Read more

एक कुर्सी के भूखे हम ---आर के रस्तोगी

( तू प्यार का सागर है,तेरी एक बूँद के प्यासे हम की तर्ज पे एक पैरोडी आज के चुनाव के माहौल में ) एक कुर्सी के भूखे हम | तेर... Read more

दिल कह रहा कि ताउम्र ऐसे तुझे देखता रहूँ।

दिल कह रहा कि ताउम्र ऐसे तुझे देखता रहूँ। तेरे बारे में दिन -रात मैं सोचता रहूँ। मासूम से ये चेहरा और उस... Read more

माँ द्वारा लगाया पेड़

65 वर्ष का रामदीन, गर्मी के मौसम में थककर छाया देखकर खेत किनारे पेड़ के नीचे लेट जाता है । सोते सोते अपने बचपन मे चला जाता है, जब उस... Read more

रोज खिड़की के पास

रोज खिड़की के पास आँखें मुंद कर महसूस किया करती हुँ तुम्हें और भोर की सुनहली किरणों से वादा किया करती हूँँ मैं नहीं रोऊँँगी स... Read more

पिया के हाथ की चाय (लघु कविता)

# कविता # पिया के हाथ की चाय सुबह हो गई हाय मोहे मन भाय गरम-गरम एक प्याली पिया के हाथ की चाय इस चाय में है वो जादू... Read more

लब तुम्हारे मौन हैं

उठ रहा तूफ़ान दिल में लब तुम्हारे मौन हैं कह रही खामोशियाँ क्यों शोर सारे मौन हैं आज से पहले न बातें खत्म होती थी कभी बातें क... Read more

सुन पगली

सुन पगली, है पगली, तुम पगली तेरे प्यार में मर जाऊं मैं पगली केवल देखती, नहीं दिखाती हंस-हंसकर तड़पाती है समय-समय पर कभी भी मुझस... Read more

दर्द

दर्द के साथ हम कहाँ जीते हैं दर्द हमसे जीता है हमारे ह्रदय में पलता है बढता है- सांंसे लेता है अपनी आयु लंबी कर हमारी क्षीण कर... Read more

कद्र करो समय का

दिनांक 19/4/19 है जिन्दगी की दौड़ जीवन में हैं कई मौड़ मची है आपाधापी हर और इन्सान लगा है पकडने समय को आता नहीँ हाथ व... Read more

दोष बिच्छू का नहीं...

दोष बिच्छू का नहीं... की उस ने हमें काटा, 'जहर' हमारे शरीर में फैलाया, काटना और ज़हर फैलाना धर्म है उसका ... वो अपने धर्म पे... Read more

हर बार पूछती हो " कैसे हो "

बम्बई 13 मई 1983 " स्वरा " पिछले मंगल को चिट्ठी मिली थी तुम्हारी पर जवाब अब दे रहा हूं लिहाजा मेरा जवाबी खत़ भी तुम्हे देर से... Read more

कविता

खाली मन को भरने आती, रोज रोज दिल को बहलाती । सुख दुःख की मेरी संगिनी, इस जग को जग से मिलवाती। जीवन पथ पर साथ निभाती, हर पल वो... Read more

"धैर्य एवं संयम का बांध" (लघुकथा )

आज फिर से तुम देर से कार्यालय आ रही हो वर्षा, अधिकारी ने वर्षा से डांटकर कहा । तुम्हें मालूम नहीं है ?? कितना सारा कार्य पूर्ण करना ... Read more

ग़ज़ल- होना था तन्हा हुआ रंजूर तो

ग़ज़ल- होना था तन्हा हुआ रंजूर तो ★★★★★★★★★★★★★ होना था तन्हा हुआ रंजूर तो तुम भी जाओ जा रहे हो दूर तो कोई मुझसे प्यार अब करता... Read more

बचपन की यादे ---आर के रस्तोगी

मत दिलाओ बचपन की यादे, वह खूब याद आता है | पुरानी बाते याद करके,वह बचपन लौट कर आता है || एक आने में चार जलेबी दो कचोडी में नाश्त... Read more

ग़ज़ल

"आदमी" 2122 2122 212 ऐब दुनिया के गिनाता आदमी। आपसी रंजिश बढ़ाता आदमी। चंद सिक्कों में बिकी इंसानियत भूल गैरत आजमाता आद... Read more

वास्तविकता क्यों नहीं दिखाते ? #100 शब्दों की कहानी#

मैं ऑफिस में विद्यालयों से प्राप्त शिकायतों के संबंध में जांचोपरांत उच्च-अधिकारी द्वारा दिये गए निर्देशानुसार मुख्यालय को भेजने हेत... Read more

सोचा ना था

जीवन की सुनहली सुबह मे बड़ी तमन्यता से तिनका - तिनका जोड़ा था उसने और बनाया सपनों का घोंसला अपनो के लिये तब सौचा ना था जीवन ... Read more

Tic Toc Pe Shayri टिक टॉक पे शायरी

बे शर्मी और हया का जो पिक-पाक हो गया।। एक्टिंग का जो नशा था वो खाक हो गया ।। चेहरे उतर गए हैं उन लोगों की दोस्तों , ... Read more

रफ़्ता रफ़्ता हाथों से किनारा गया

दस्तो सहरा में दिन गुजारा गया दर्द सीने में ऐसे उतारा गया शौके गौहर में हम ना जमी के रहे रफ़्ता रफ़्ता हाथों से किनारा गया स्य... Read more

rahiman dhaga

rahiman dhaga prem ka mat todo chatkaya, tode se phir na jude aur jude gath pr jay Read more

दुनियाँ फूलों की

दिनांक 18/4/19 फूलों की दुनियां होती है निराली खुद हँसते हैं हर माहौल में सिखाते हैं हँसना हँसाना इन्सान को बेखबर रहते है... Read more

मंजिल तक कदम

दिनांक 18/4/19 है कदम ताकत इन्सान की मजबूत कदम पहुंचाते है मंजिल तक दृढ़ रखो अपने ईरादे विश्वास रखो पैरों पर तभ... Read more

मन ( विचार सागर )

मन के हारे हार है मन के जीते जीत अपने मन को खुश रखिए सदैव सफलता हासिल किजीए Read more