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Category: गज़ल/गीतिका

दो बह्र पर एक प्रयास
दो बहरी गजल:- 1बह्र:-2122-1122-112­2-112 2बह्र:-2122-2122-212­2-212 बेसबब रिश्ते -ओ-नातों के लिए बिफरे मिले।। जब मिले मुझको मेरे सपने बहुत उलझे मिले।। ज़िन्दगी जिनसे मिला सब ही... Read more
था खौफ ए दुनियां तो ख्वाबों में रबता करते
था खौफ ए दुनियां तो खुवाबों में राब्ता'करते" मेरे वजूद से खुद को यूँ आशना' करते। जो अपनी ज़ुल्फों का तुम साया कर दिया'करते" उबूर... Read more
गान तेरा सदा गुनगगुनाता रहूं।
गीत तेरे लिखूं छंद तेरे लिखूं गान तेरा सदा गुनगुनाता रहूं। रक्त अपना बहा सरहदों पर ते'री, भारती कर्ज तेरा चुकाता रहूं।। शारदे दीजिये धार... Read more
कली बुझी बुझी हुई गुलों में ताज़गी नहीं
कली बुझी बुझी हुई गुलों में ताज़गी नहीं सभी बहुत उदास हैं नसीब में ख़ुशी नहीं बहार वादियों से छीन ले गई है ख़ुश्बुएं चमन... Read more
शारदे माँ
शारदे माँ सज रही तुम, आज वीणा बजाती संगीत में रमी तुम, हर तान है लुभाती तू ज्ञान का समुद्र,दो बूँद चाहती मैं झोली भरो... Read more
लिपटकर हम न साहिल  से कभी  रोये  यहाँ  यारो जिये   तूफ़ान  की  जद   में  हमें  आंधी ने पाला है
कहीं है चर्च गुरुद्वारा कहीं मस्जिद शिवाला है ख़ुदा को भी सभी ने कर यहाँ तक़सीम डाला है किसी ने आज देखा है मुझे तिरछी... Read more
*गीतिका*
समन्दर प्यास कब किस की कभी देखो मिटाता है हमेशा प्यास तो पावन नदी का जल बुझाता है वफा के नाम पर मिटना उसे कब... Read more
तुम्हें जोहते बैठे रहे चौबारों में /ग़ज़ल/
तुम्हें जोहते बैठे रहे चौबारों में देखने को मजबूर हुए ख्वाबों में बेसुध मन बेखबर हो गए ज़माने से जबसे जीने लगे तेरी इन वफ़ाओं... Read more