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ग़ज़ल

Deepesh Dwivedi

Deepesh Dwivedi

गज़ल/गीतिका

August 3, 2016

वो कहते हैं हम तो ख़ुदा हो गए हैं
ख़ुदा जाने वो क्या से क्या हो गए हैं
कदमबोसी करते नज़र आते थे जो
वो लगता है अब आसमां हो गए हैं
न जाने हवाओं मे है शोर कैसा
कि परवत भी दहशतजदा हो गए हैं
ये दुनिया तो ऐसे ही चलती रहेगी
“चिराग़”आप क्यों ग़मज़दा हो गए हैं

Author
Deepesh Dwivedi
साहित्य,दर्शन एवं अध्यात्म मे विशेष रुचि। 30 वर्षो से राजभाषा कार्मिक। गृहपत्रिका एवं सामयीकियों मे कतिपय रचनाओं का प्रकाशन।
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