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ख़्वाब

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गीत

January 2, 2017

मैंने देखा था इक ख़्वाब मगर
आँख लगने लगी उसमें मेरी
हर हक़ीक़त बनने लगा ख़्वाब
जब लेने लगा मैं ख़्वाब ही ख़्वाब ।।
तन्द्रा टूटी-2 जबी मेरी
हक़ीक़त कुछ और बयां करती थी
जिंदगी मेँ-2 चलना था
हकीकत के इशारों पर-2
मैंने समझा था तब
ख़्वाब होते नहीं सब पूरे-2
अब जिन्दगी का रुख मैंने पहचाना
बदली दुनियां मेरी-2
बदला ख़्वाब का रुख अनजाना
जीना सीखा है अब मैंने-2
जिन्दगी की हकीकत के सहारे
ख़्वाब का सिलसिला-2
हकीकत के दायरे में अब ढला
मैंने देखा इक ख़्वाब मगर ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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