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हौसला

Abhishek bharti

Abhishek bharti

शेर

October 9, 2016

जख्म देती इस ज़िन्दगी को समर्पित कुछ पंक्तिया।

मैं तो दरिया हूँ बहता ही चला जाऊंगा,

तू जख्म दे मैं सहता ही चला जाऊंगा,

तू ना सोच खुश्बू कभी कम होगी मेरी,

मैं तो”चंदन” हूँ महकता ही चला जाऊंगा।

अभिषेक भारती”चंदन”

Author
Abhishek bharti
शिक्षक (गणित और हिंदी)
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