.
Skip to content

हाल- ए-दिल

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

कविता

September 24, 2016

मैं वाक़िफ़ हूँ इस हकीक़त से,तू मेरा हमराह नहीं हो सकता,
मैं भी मेरी शरीक-ऐ-हयात से बेवफा नहीं हो सकता,
फिर क्यूँ मेरा दिल तेरे लिए तड़प के आह भरता है,
जबकि इसे भी खबर है मेरा प्यार मुक़म्मल नहीं हो सकता,
इश्क़ है मुझे मेरी हमसफ़र से इस बात से इक़रार है,
मुहब्बत मुझे तुझसे हो गयी है मैं इंकार नहीं कर सकता,
चल तो सकता हूँ मैं तेरे साथ एक साये की तरह,
मुझे अफ़सोस है मैं तेरा हमसाया नहीं हो सकता,
उस वक़्त थामा था हाथ मेरा उसने जब मैं टूट रहा था,
मैं उसको भी तो टूटने नहीं दे सकता,
अब इस नादाँ दिल की धड़कनों को किस तरह समझाऊँ,
ये अब किसी और के लिए नहीं धड़क सकता,
मेरा रूह का रिश्ता है मेरी शरीक-ऐ-हयात के साथ,
अब ये किसी को अपनी रूह में शरीक नहीं कर सकता।

“संदीप कुमार”

Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती... Read more
Recommended Posts
इंसानियत से इंसान पैदा होते है !
एक बूंद हूँ ! बरसात की ! मोती बनना मेरी फिदरत ! गर मिल जाए, किसी सीपी का मुख खुला ! मनका भी हूँ... धागा... Read more
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 मदयुक्त भ्रमर के गुंजन सी, करती हो भ्रमण मेरे उर पर। स्नेह भरी लतिका लगती , पड़ जाती दृष्टि जभी तुम पर।। अवयव की... Read more
मै भी भीग जाऊँ!!
मैं भी भीग जाऊँ। ........................ सोचता हूँ एकबार मैं भी भीग जाऊँ। इस बरसात प्रिय के साथ घनी जुल्फों की छाव में प्रियतम की बाहों... Read more
दूरी बनाम दायरे
दूरी बनाम दायरे सुन, इस कदर इक दूजे से,दूर हम होते चले गए। न मंजिलें मिली हमको, रास्ते भी खोते चले गए। न मैं कुछ... Read more