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हाईकू

Bikash Baruah

Bikash Baruah

हाइकु

August 20, 2017

(क)
कुछ नहीं मेरे पास
सिर्फ जज्बों का सौगात
आज की बेतुकी बात ।
(ख)
जिंदगी लगती मौत
दिल पर करती आघात
दिन भी लगती रात ।
(ग)
जख्म पर मरहम क्यों
दुआ की जरूरत क्यों
हसीना तेरी झलक काफी ।
(घ)
दो गज जमीन काफी
सोने की क्या कीमत
चार कंधा है काफी ।
(ड)
प्रार्थना करें क्यों
ईश्वर से डरे क्यों
हम में वह बसते है ।
(च)
गम में खुशी मनाओ
खुशी में मनाओ गम
जिंदगी गुजारो यों हरदम ।
(छ)
पैगाम दे जिंदगी तू
मौत को सजने संवरने की
बदल दे घड़ी वक्त की ।

Author
Bikash Baruah
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।
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