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हाइकु

मंजूषा मन

मंजूषा मन

हाइकु

August 19, 2017

1.
भूल जाना तो
सरल है बहुत
कठिन यादें।

2.
छल करना
कभी आया ही नहीं
छले ही गये।

3.
पिछड़ गए
तेज रफ्तार था वो
रुक न सका।

4.
नींद में ख्वाब
देखो तो देखो तुम
हम जाग के।

5.
खोल दिए हैं
सब खिड़की द्वारे
अब तो आओ।

6.
दूर हो तुम
हजारों मील बसे
मन के पास।

7.
अब क्या कहें
शब्द मौन हुए हैं
चुप ही रहें।

8.
चाँद सुनाए
बस तेरी ही बातें
यूँ बीतें रातें।

मंजूषा मन

Author
मंजूषा मन
मन के भावों की अभिव्यक्ति ही कविता है...
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