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हम ही तो वो है जिन्होंने शून्य का इतिहास रचा…

अरविन्द दाँगी

अरविन्द दाँगी "विकल"

कविता

March 30, 2017

हम ही तो वो है जिन्होंने शून्य का इतिहास रचा,
हम ही तो वो है जिन्होंने सिकन्दर के कदमो को रोका।

लव कुश की धरा पर जो राम के वंशज हुऐ है,
हम ही तो वो हैं जिन्होंने अभिमन्यु बन व्यूह साधा।

कुछ नामुमकिन नही मुमकिन यही है,
बस हुआ संभव असंभव कुछ नहीं,
हमने अगर लक्ष्य को अर्जुन बन गाण्डीव से साधा।

✍अरविन्द दाँगी “विकल”

Author
अरविन्द दाँगी
जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"
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