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हम भी तो तुम्हारी बेटी है

Ananya Shree

Ananya Shree

कविता

January 25, 2017

मत फूँको लोभी दहेज के
हम भी तो तुम्हारी बेटी हैं

हाथों में लगी प्यारी मेहँदी
मत उनको छालों में बदलो
हल्दी का उबटन खूब लगा
अंगारों में न अब बदलो

कल थी जो डोली में बैठी
वो आज चिता में लेटी है
हम भी तो तुम्हारी बेटी है

काँधे पर बाबुल के आई
माता की कोख की मैं जाई
भईया की मैं इक बहना हूँ
नानी नाना का गहना हूँ

मत काटो सिर को समझ के ये
जैसे की हम कोई खेती है
हम भी तो तुम्हारी बेटी है

धन दौलत काम नहीं आती
बिन बहू चौखट भी शर्माती
दो कुल का मान बढ़ाती है
खुशियों का दीप जलाती है

आदर्श और संस्कारों को
हम अपने गर्भ में सेती हैं
हम भी तो तुम्हारी बेटी है!

मत फूँको लोभी दहेज के
हम भी तो तुम्हारी बेटी हैं

Author
Ananya Shree
प्रधान सम्पादिका "नारी तू कल्याणी हिंदी राष्ट्रीय मासिक पत्रिका"
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